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SHANTI Act: नवीकरणीय ऊर्जा की चुनौतियों का समाधान बनेगा परमाणु कानून? आर्थिक सर्वे ने गिनाए ये बड़े फायदे

Thu, 29 Jan 2026 08:12 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Economic Survey: आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में कहा गया है कि नया SHANTI Act नवीकरणीय ऊर्जा की अस्थिरता की समस्या को दूर करने में मदद करेगा। परमाणु ऊर्जा को स्वच्छ, भरोसेमंद और दीर्घकालिक समाधान बताया गया है। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
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आर्थिक सर्वेक्षण - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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देश में स्वच्छ और भरोसेमंद ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार द्वारा लाया गया नया परमाणु ऊर्जा कानून नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की कई पुरानी चुनौतियों को दूर करने में मददगार साबित हो सकता है। संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में कहा गया है कि SHANTI एक्ट के जरिए परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देना ऊर्जा सुरक्षा और निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए अहम है।
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क्या कहता है आर्थिक सर्वे?
आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि सौर और पवन ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा के सामने सबसे बड़ी समस्या अस्थिरता यानी हर समय बिजली न मिल पाना है। ऐसे में परमाणु ऊर्जा एक स्थिर और भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरती है। सर्वे के मुताबिक, परमाणु ऊर्जा न सिर्फ स्वच्छ है बल्कि लंबे समय तक लगातार बिजली देने में सक्षम है।

भारत की मौजूदा परमाणु क्षमता
सर्वे के अनुसार भारत की मौजूदा स्थापित परमाणु ऊर्जा क्षमता 8.7 गीगावॉट से अधिक है। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2047 तक देश में 100 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल की जाए। इस लक्ष्य को पूरा करने में परमाणु ऊर्जा की भूमिका बेहद अहम मानी गई है।
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भारी उद्योगों के लिए भी समाधान
आर्थिक सर्वे में बताया गया है कि भारी उद्योगों के लिए केवल सौर या पवन ऊर्जा पर निर्भर रहना तकनीकी रूप से मुश्किल है। ऐसे उद्योगों को लगातार बिजली की जरूरत होती है, जिसे परमाणु ऊर्जा आसानी से पूरा कर सकती है। इसके अलावा परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल हाइड्रोजन उत्पादन में भी किया जा सकता है, जिससे भविष्य में वाहनों और औद्योगिक प्रक्रियाओं को ऊर्जा मिल सकेगी।

 शांति एक्ट क्या है?
सरकार ने दिसंबर 2025 में सस्टेनेबल हारनेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया यानी शांति एक्ट को अपनाया। यह कानून परमाणु ऊर्जा से जुड़े पुराने कानूनों एटॉमिक एनर्जी, 1962 और सिविल लॉयबिलिटी फॉर न्यूक्लियर डैमेड एक्ट, 2010 को संशोधित और एकीकृत करता है। इसका उद्देश्य निजी क्षेत्र और राज्य सरकारों की भागीदारी को संभव बनाना है।

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निजी क्षेत्र को मिली बड़ी भूमिका
नए कानून के तहत अब निजी कंपनियां परमाणु संयंत्र संचालन, बिजली उत्पादन, उपकरण निर्माण और अनुसंधान जैसे कार्यों में भाग ले सकेंगी। साथ ही, दायित्व व्यवस्था को चरणबद्ध बनाया गया है, ताकि पीड़ितों के मुआवजे से कोई समझौता न हो।

सरकार का दीर्घकालिक रोडमैप
केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2025-26 में परमाणु ऊर्जा मिशन की घोषणा की थी, जिसके तहत 20,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। लक्ष्य है कि 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर विकसित कर उन्हें चालू किया जाए। आर्थिक सर्वे का कहना है कि जीवाश्म ईंधन से बाहर निकलने के लिए परमाणु ऊर्जा जैसी गैर-जीवाश्म ऊर्जा का समय पर उपलब्ध होना बेहद जरूरी है।

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