फिल्मिस्तान के अग्निकांड ने 43 परिवारों की दुनिया उजाड़ दी है। मृतकों में से 29 की पहचान कर ली गई है, जबकि अभी भी ऐसे कई शव हैं जिनकी पहचान नहीं हो पाई है। मृतकों के दोस्त-रिश्तेदार एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल अपने रिश्तेदारों को खोजने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। मृतकों के बारे में जानकारी देने के लिए किसी केंद्रीकृत इकाई के अभाव में लोगों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। वहीं, कुछ शवों का कोई दावेदार अब तक सामने नहीं आया है। माना जा रहा है कि यूपी-बिहार के कई ऐसे भी मजदूर यहां काम करते थे जिनका यहां कोई दूसरा करीबी नहीं है। वे इसी इमारत में ही रहते भी थे। ऐसे में उनका कोई पड़ोसी भी नहीं है। इन शवों की पहचान होने में समय लग सकता है।
रविवार सुबह लगभग पांच बजे घटी इस दर्दनाक घटना के बाद अब यहां सन्नाटा पसरा है। पुलिस ने पूरी एरिया की घेरेबंदी कर दी है। स्थानीय निवासियों के आलावा वहां किसी को भी आने-जाने नहीं दिया जा रहा है। रानी झांसी रोड पर फिल्मिस्तान के आसपास एक तरफ का सड़क यातायात रोक दिया गया है। रविवार को यहां साप्ताहिक अवकाश के कारण बंदी रहती है। लेकिन स्थानीय लोग घूमने-फिरने के लिए अपने परिवार के साथ निकलते हैं। लेकिन इस अग्निकांड ने यहां के लोगों की जिन्दादिली पर कुछ समय के लिए ही सही, ताला लगा दिया है, और पूरे बाजार में सन्नाटा छाया हुआ है।
अपने एक रिश्तेदार को खोजने एलएनजेपी अस्पताल पहुंची एक महिला खालिदा ने बताया कि उनके बहनोई इमारान और उनके दोनों बेटे इसी इमारत की एक फैक्टरी में काम करते थे। वे सभी अस्पतालों के चक्कर लगा आई हैं, लेकिन अब तक उनका कोई अतापता नहीं है। उन्होंने बताया कि कई फैक्टरियों में लोग परिवार के साथ-साथ काम करते थे। ऐसे में एक ही परिवार के कई सदस्यों के भी जान गंवाने की आशंका है।