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कोरोना का नया रूप: भारत में वायरस के प्रसार की आशंका को नकारना नामुमकिन, जानें क्यों

Tue, 22 Dec 2020 11:33 AM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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coronavirus - फोटो : अमर उजाला
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ब्रिटेन में कोरोना वायरस के नए रूप को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। ऐसे में भारत में भी चिंताएं बढ़ी हुई नजर आ रही हैं, क्योंकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है कि भारत में यह वायरस मौजूद ना हो। 

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नए 'कोविड स्ट्रेन' की जांच के लिए अभी कोई नैदानिक परीक्षण की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है कि यह भारत के अन्य हिस्सों में नहीं फैल रहा हो। इसलिए विशेषज्ञों ने नए स्ट्रेन (वायरस के नए रूप) को देखने के लिए मौजूदा कोविड पॉजिटिव नमूनों के परीक्षण और अनुक्रम के तरीकों पर काम करना शुरू कर दिया है।

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महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में स्थित कस्तूरबा अस्पताल में बीएमसी की माॅलेकुलर डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी ने सितंबर के बाद के विभिन्न बिंदुओं पर संग्रहित और सुरक्षित रखे गए नमूनों के माध्यम से जानकारी निकालने का एक अनूठा तरीका तैयार किया है।

माइक्रोबायोलॉजिस्ट ऐसे नमूनों की तलाश करेंगे, जिनमें आरटी-पीसीआर परीक्षणों के दौरान 'एस जीन' (कोरोना वायरस पर) नहीं दिखा था। कस्तूरबा डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी की प्रमुख डॉ जयंती शास्त्री ने कहा कि हम उन पॉजिटिव नमूनों की जांच करेंगे, जो एस जीन का पता लगाने से चूक गए हैं और उन्हें अनुक्रमित किया जाएगा। उन्होंने कहा, मैंने पहले ही अपनी टीम को ऐसे नमूनों के लिए पूर्वव्यापी जांच करने को कहा है। हम आगे उन्हें पुणे में स्थित एनआईवी में अनुक्रमित करवाएंगे।

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जिन स्वैब नमूनों को कोविड-19 पॉजिटिव के रूप में प्रमाणित किया गया है। अब उनमें आरटी-पीसीआर परीक्षण के जरिए दो जीन की लोकेशन का पता लगाने की जरूरत है। आम तौर पर आरटी-पीसीआर परीक्षण किट के जरिए एन, एस और ओआरएफ जीन की पहचान की जाती है। 
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डॉ शात्री ने कहा, स्वैब नमूनों में अगर दो जीन की पहचान की जाती है, तो उसे सार्स-सीओवी-2 (कोरोना वायरस) संक्रमित के रूप में माना जाता है। हालांकि, ब्रिटेन में पाए गए वायरस के नए रूप में एस जीन की पहचान नहीं हो पाई। 



यही वजह है कि अब भारत में भी नमूनों के भीतर एस जीन की पहचान करने के लिए काम शुरू किया जाएगा। सितंबर के बाद ब्रिटेन में सामने आए 62 फीसदी मामलों के पीछे वायरस के इस नए रूप का हाथ रहा है। ऑस्ट्रेलिया, इटली, आइसलैंड और डेनमार्क में भी कुछ मामले सामने आए हैं, जो इस नए वायरस से जुड़े हुए हैं। 

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