असम में हाल की बाढ़ से हुई तबाही का आकलन अब राहत से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर पुनर्वास और पुनर्निर्माण की दिशा में पहुंच गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने सोमवार को कहा कि शिवसागर और चराइदेव जिलों में नुकसान टेलीविजन पर दिखाई जा रही तस्वीरों से कहीं अधिक गंभीर है। कुछ इलाकों में स्थिति ऐसी है कि सरकार को पूरे गांवों का पुनर्निर्माण करना पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का जायजा लिया
मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित नेपाली खुटी क्षेत्र का ट्रैक्टर से दौरा कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि बिहुबोर, नेपाली खुटी, बेतबाड़ी और नीमाइजन जैसे इलाकों में घरों, पशुधन और स्थानीय ढांचे को व्यापक नुकसान हुआ है। ऐसे क्षेत्रों में केवल तत्काल राहत पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि व्यापक पुनर्वास की जरूरत होगी।
अंतरिम राहत के लिए पहली किस्त जारी की
सरकार ने बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए अंतरिम राहत की पहली किस्त के तौर पर 160 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसके तहत पात्र परिवारों को 15-15 हजार रुपये मिलेंगे। पहले चरण में सिवसागर के 35 हजार से अधिक, चराइदेव के 19 हजार से अधिक, जोरहाट के चार हजार से अधिक और गोलाघाट के दो हजार से अधिक परिवारों को सहायता दी जाएगी। आकलन पूरा होने के बाद लाभार्थियों की संख्या 75 हजार तक पहुंच सकती है।
शिवसागर और चराइदेव में जो परिवार नौ अगस्त तक अपने घर नहीं लौट पाते हैं, उन्हें 10 अगस्त से अतिरिक्त 10 हजार रुपये दिए जाएंगे। वहीं, 10 अगस्त से चारों जिलों में बाढ़ से हुए नुकसान और मौतों का जमीनी स्तर पर व्यापक आकलन शुरू होगा। इसी बीच ब्रह्मपुत्र के लगातार कटाव से निपटने के लिए सरकार भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गुवाहाटी के विशेषज्ञों की मदद लेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी कटाव असम की सबसे बड़ी भौगोलिक चुनौतियों में से एक है। सरकार 90 करोड़ रुपये की कटाव-रोधी परियोजना के साथ आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक उपायों पर काम करेगी।