तिनसुकिया जिले में बने सबसे लंबे पुल का पिछले पचास सालों से इंतजार था। यह असम को अरुणाचल प्रदेश से जोड़ेगा। इससे दोनों राज्यों के बीच 165 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। यानी असम से अरुणाचल प्रदेश जाने में 4 घंटे कम लगेंगे। असम के साथ पूरे देश के लिए यह पुल बेहद फायदेमंद है। सादिया के अदरक के व्यापारियों को इससे ज्यादा फायदा होगा। पुल के बन जाने से प्रतिदिन 10 लाख रुपये का ईंधन बचेगा।
पुल करीब 9 किलोमीटर लंबा है। वर्तमान में इससे ट्रांसपोर्टेशन तो आसान होगा ही, इसके अलावा क्षेत्रीय विकास में भी ये ब्रिज अपनी भूमिका निभाएगा। कई जगहों के बीच दूरी कम होने से उत्पादों की कीमतें भी कम हो जाएंगी। पुल से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। पुल की वजह से अरुणाचल प्रदेश और दक्षिण आसियान देशों के बीच सीमा व्यापार में बढोतरी होगी। ब्रह्मपुत्र नदी के 375 किलोमीटर लंबे किनारों को जोड़ने के लिए बेहतर पुल नहीं थे। इस पुल से अब परिवहन में आसानी होगी। उत्तरी असम को अधिक फायदा होगा। अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा पर सैनिकों के लिए आवश्यक सामग्री जल्दी पहुंच सकेगी। पुल से भारत को चीन के खिलाफ काफी सामरिक लाभ होगा। इस पुल से युद्धक टैंक को ले जाया जा सकता है। भारी युद्धक टैंकों के भार को यह झेल सकता है। पुल से चीन सीमा की हवाई दूरी करीब 100 किमी है। इससे सेना की चीन सीमा वैलोंग-किबिथू सेक्टर पर पहुंच आसान होगी।
सादिया की करीब एक लाख बीस हजार आबादी तथा अरुणाचल प्रदेश के करीब एक लाख लोगों को इससे सबसे अधिक फायदा होगा। अभी परसुराम कुंड ब्रिज से धोला गांव से सादिया इस्लामपुर तिनिआली के बीच करीब 8 घंटे लगते हैं। ब्रह्मपुत्र नदी में जल परिवहन के साधनों से इन दोनों के बीच करीब साढ़े चार घंटे का समय लगता है, लेकिन अब पुल के बन जाने से दोनों के बीच में आधे घंटे कम वक्त लगेगा।