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आरएसएस पर आ रही नई किताब, एबीवीपी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री आंबेकर ने बताया कैसे काम करता है संघ?

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सुनील आंबेकर - फोटो : सोशल मीडिया
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आरएसएस पर किताब लिखने वाले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुनील आंबेकर का कहना है कि सामान्य लोग संघ से भयभीत नहीं होते हैं। हिंदुत्व और संघ से वो ही डरते हैं जिनका विचार बंदूक की नली से सत्ता स्थापित करना है। जो भारत के टुकड़े-टुकड़े करने वालों का समर्थन करते हैं, ऐसे लोग संघ और हिंदुत्व को लेकर जनता के बीच भय का माहौल बनाते हैं। आंबेकर ने अपनी आने वाली किताब- 'द आरएसएस: रोडमैप्स फॉर 21 सेंचुरी' के उद्घाटन से पहले यह बात कही है।

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उन्होंने कहा कि संघ के लिए समाजिक विकास सर्वोपरि है। 94 सालों से आरएसएस समाज को मजबूत करने का काम कर रहा है। विरोध करने से पहले संघ को समझना बेहद जरूरी है। दुनिया में किसी को भी हिंदुत्व की विचार पद्धति से भय खाने की जरूरत नहीं है। हिंदुत्व का मूल तत्व ही एकत्व की अनुभूति है। जो विचार एकत्व की बात करता हो उससे डर कैसा? आंबेकर ने कहा कि अल्पसंख्यकों के नाम पर राजनीति करने वाले संघ को लेकर गलत धारणा फैलाते रहते हैं लेकिन संघ चुपचाप समाज के बीच अपना काम करता है।

आरएसएस - फोटो : अमर उजाला
सुनील आंबेकर ने वामपंथियों पर हमला करते हुए कहा कि रूस के कम्युनिस्टों ने अपने देश की जय-जयकार करने में पूरी ताकत झोंक दी। नेपाल और चीन के वामपंथियों ने भी अपने-अपने देश की जयकार करने में पूरी शक्ति लगाई। लेकिन भारत में इस मामले में बौद्धिक भ्रष्टाचार हो गया और यहां के वामपंथियों ने अपनी पूरी ताकत भारत के टुकड़े करने वालों के समर्थन में लगा रखी है।

सुनील आंबेकर ने कहा कि राम मंदिर के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्टैंड स्पष्ट है। भगवान राम, देश की अस्मिता हैं। हमारे सांस्कृतिक मूल्यों के प्रतीक हैं। भारत में अनेक मंदिर और मस्जिद हैं लेकिन रामजन्म भूमि एक ही है। करोड़ों लोगों की इच्छा वहां भव्य राम मंदिर बनाने की है। मंदिर निर्माण को लेकर जो भी फैसला होगा वह संविधान, कानून और लोकतंत्र के दायरे में होगा। 
 
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सुनील आंबेकर - फोटो : अमर उजाला
किताब बताएगी कैसे काम करता है संघ और कैसे होती है ट्रेनिंग?
सुनील आंबेकर ने कहा कि उनकी किताब में संघ की कार्यप्रणाली और ढांचे के बारे में विस्तार से बताया गया है। संघ कैसे काम करता है और उसका स्वरूप कैसे तय होता है, किताब में इस बात की जानकारी दी गई है। किताब में बताया गया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव राव बलीराम हेडगेवार के मन में संघ की स्थापना का विचार कैसे आया। उन्होंने कहा कि संघ व्यापक संगठन है और कई विषयों को लेकर समाज में काम करता है। ऐसे में संघ की भूमिका को एक किताब में समेटना काफी चुनौतीभरा काम था। 

उन्होंने कहा कि संघ पर सवाल उठाने वालों को यह सोचना चाहिए कि डॉ हेडगेवार चाहते तो खुद का राजनीतिक दल बना सकते थे और उस दल के अध्यक्ष बन सकते थे। लेकिन उनके मन में समाज को मजबूत करने का विचार था। किताब में बताया गया है कि संघ की शाखाओं का संचालन, ट्रेनिंग और गतिविधियां कैसे होती हैं। किताब का विमोचन एक अक्टूबर को संघ प्रमुख मोहन भागवत करेंगे। 

40 सालों से संघ से जुड़े हैं आंबेकर
सुनील आंबेकर पिछले चालीस सालों से संघ से जुड़े हैं। वह नागपुर से आते हैं। उन्होंने कहा कि इस किताब में संघ के संवैधानिक ढांचे को विस्तार से बताया गया है। किताब में व्यक्तिगत अनुभव भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि किताब के पूरा होने पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इसके बारे में पूरी जानकारी ली और उनकी प्रतिक्रिया अच्छी थी। आंबेकर ने बताया कि उन्हें संघ प्रमुख का मार्गदर्शन उस वक्त से मिल रहा है जब मोहन भागवत विदर्भ प्रांत के प्रचारक थे।

सुनील आंबेकर ने संघ में जातिगत भेदभाव के मसले पर कहा कि संगठन में किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होता। हर कोई एक समान है। संगठन से जुड़ने वाले किसी कार्यकर्ता से उसकी जाति नहीं पूछी जाती है। आरएसएस में सभी लोग  मिलकर समाज के विकास के लिए काम करते हैं।
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