अपने ओजस्वी भाषणों और चुटीले अंदाज में हाजिरजवाबी के कारण संसद से लेकर जन-जन के दिलों में जगह बना चुके अटल बिहारी वाजपेयी सबसे पहले वामपंथी विचारधारा से ही जुड़े थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में रहते हुए उन्हें विपक्षी नेता भी कभी कट्टर विचारधारा वाले नहीं बल्कि उदारवादी नेता मानते थे।
एक इंटरव्यू के दौरान खुद उन्होंने स्वीकार किया था कि बालक होने के नाते वह आर्यकुमार सभा के सदस्य बने थे। बाद में संघ के संपर्क में आए। 1942-45 तक अटल ने भारत छोड़ो आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। वाजपेयी 1977-79 की मोरारजी देसाई सरकार में पहले गैर कांग्रेसी विदेश मंत्री बने और संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण देने वाले पहले विदेश मंत्री भी थे।
सन 1980 में असंतुष्ट होकर उन्होंने जनता पार्टी छोड़ दी और भाजपा की स्थापना में अहम भूमिका निभाई। अटल जी पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री रहे, जिन्होंने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया। प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने और विश्व में देश की बेहतर छवि बनाने के लिए निजीकरण का अभियान चलाया था।
उन्होंने 1999 में दिल्ली से लाहौर तक बस सेवा की शुरुआत की। पाकिस्तान की यात्रा कर नवाज शरीफ से मुलाकात की। हालांकि, इस यात्रा को लेकर उन्हें भाजपा के कुछ नेताओं की आलोचना भी झेलनी पड़ी। सद्भावना यात्रा के कुछ समय बाद पाकिस्तानी सेना ने करगिल में घुसपैठ कर कई पहाड़ी चोटियों पर कब्जा कर लिया। अटल सरकार के ठोस नेतृत्व में भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब देते हुए भारतीय क्षेत्र को मुक्त कराया।
पोखरण परमाणु विस्फोट कर दुनिया को चौंकाया
अटल सरकार ने 11 और 13 मई को पोखरण में पांच भूमिगत परमाणु विस्फोट कर भारत को परमाणु संपन्न देश घोषित किया। इस कदम से उन्होंने भारत को विश्व के मानचित्र पर वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया। इसे इतनी गोपनीयता से किया गया कि पश्चिमी देशों को इसकी भनक तक नहीं लगी।