नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते चंद्र कुमार बोस ने भाजपा से किनारा कर लिया है। उन्होंने कहा कि अब आगे बढ़ना मेरे लिए संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि 2016 में मैंने भाजपा का दामन थामा था। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व से प्रेरित था। मेरे सिद्धांत मेरे दादा सरथ चंद्र बोस और उनके छोटे भाई नेताजी सुभाष चंद्र बोस से प्रेरित हैं। उनके सिद्धांत थे कि वे हर धर्म को भारतीय के रूप में देखते थे। उन्होंने विभाजन और सांप्रदायिकता की राजनीति के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
भाजपा से अपने इस्तीफे पर चंद्र कुमार बोस ने कहा कि मैंने बंगाल की रणनीति के संबंध में भाजपा में राज्य और केंद्रीय नेतृत्व को कई प्रस्ताव दिए, लेकिन उन्होंने कभी भी मेरे प्रस्तावों को लागू नहीं किया। उन्हें लगा कि यह उपयोगी था फिर भी मेरा कोई भी प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया। ऐसे में इस पार्टी के साथ रहने का कोई मतलब नहीं है। मैं ऐसे काम करने में सक्षम नहीं हूं। इसलिए मैंने सोचा कि इस पार्टी के साथ रहना ठीक नहीं होगा। मैंने जेपी नड्डा को यह स्पष्ट कर दिया है कि मेरी शुभकामनाएं पार्टी के साथ हैं, लेकिन उन्हें सभी समुदायों को एकजुट करना चाहिए।
'इंडिया-भारत' विवाद पर चंद्र कुमार बोस ने कहा कि भारत के संविधान में साफ लिखा है कि 'इंडिया दैट इज भारत, राज्यों का संघ'। भारत और इंडिया एक ही हैं। जब दोनों का मतलब एक ही है, तो आप जो भी बोलते हैं उसका मतलब भी एक ही है। इससे जुड़ा विवाद कोई मुद्दा नहीं है।