प्रवेश परीक्षा लटकने से शोध कार्य लगभग ठप है। कई शिक्षक ऐसे हैं, जिनके पास रिसर्च स्कॉलर नहीं हैं। कुलपति प्रो. वीके सिंह ने बताया कि प्रवेश परीक्षा में सफल नेट, जेआरएफ के अभ्यर्थियों को दाखिले में वरीयता दी जाएगी, लेकिन आवेदन फॉर्म भरने वाले हर अभ्यर्थी को अब अनिवार्य रूप से प्रवेश परीक्षा देनी होगी। इससे पहले नेट, जेआरएफ स्कोर हासिल करने वाले अभ्यर्थियों को छूट दी गई थी। पीएचडी के अलग-अलग पाठ्यक्रमों में दाखिले का सीधा विकल्प मिला था।
अच्छा शोध नहीं कर पा रहे थे जेआरएफ
नेट, जेआरएफ को पीएचडी में सीधे दाखिले का विरोध हुआ था। शिक्षकों ने कहा था कि कुछ जेआरएफ अच्छा शोध नहीं कर पा रहे हैं। इसको ध्यान में रखकर ही अध्यादेश में बदलाव किया गया है।
सात साल से बंद है प्रवेश परीक्षा
विश्वविद्यालय में पीएचडी की प्रवेश परीक्षा पिछले सात साल से नहीं हुई है। 2011 में पीएचडी की सीटें भरी गई थीं। 2012 से 2018 के बीच प्रवेश परीक्षा नहीं कराई जा सकी। इस वजह से ज्यादातर सीटें खाली हैं।