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Nepal Politics: प्रचंड के खिलाफ चलेगा आपराधिक मुकदमा, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नौ राजनीतिक दलों ने जताई चिंता

Mon, 06 Mar 2023 08:58 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू

सार

शीर्ष कोर्ट के आदेश का हवाला दिए बिना इन दलों की ओर से जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि हाल ही में संक्रमणकालीन न्याय प्रक्रिया में उठाए गए मुद्दों ने हमारा गंभीरता से ध्यान आकर्षित किया है। 
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नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' - फोटो : cmprachanda.com
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विस्तार
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नेपाल की सुप्रीम कोर्ट ने बीते शुक्रवार को प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड के खिलाफ रिट याचिका दाखिल करने के लिए प्रशासन को आदेश दिया। इसके बाद सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) इस आदेश पर आपत्ति जताई थी। इस बीच, सोमवार को नौ राजनीतिक दलों ने भी इस पर चिंता जताई है। 

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शीर्ष कोर्ट के आदेश का हवाला दिए बिना इन दलों की ओर से जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि हाल ही में संक्रमणकालीन न्याय प्रक्रिया में उठाए गए मुद्दों ने हमारा गंभीरता से ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने कहा, हम संविधान की भावना और व्यापक शांति समझौते के मुताबिक संक्रमणकालीन न्याय प्रक्रिया को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बयान में आगे कहा गया है कि इससे संबंधित कानून में संशोधन से जुड़े शेष काम जल्द ही पूरे किए जाएंगे। 

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बयान में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेशों के अनुरूप इश संबंध में एक विधेयक संघीय संसद के मौजूद सत्र में पेश किया जाएगा। राष्ट्रपति चुनाव पर चर्चा के लिए बुलाई गई पार्टियों की बैठक में शीर्ष कोर्ट का आदेश हावाी रहा। नवगठित गंठबंधन में नेपाली कांग्रेस, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र), जनता समाजवादी पार्टी, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत समाजवादी), लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी, नागरिक उन्मुक्ति पार्टी, जनमत पार्टी, राष्ट्रीय जनमोर्चा और नेपाल समाजवादी पार्टी शामिल हैं। 
   
प्रचंड की पार्टी और माओवादी केंद्र के कुछ नेताओं के साथ-साथ पूर्व माओवादी नेताओं ने प्रचंड के खिलाफ रिट याचिका दर्ज करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कड़ी आलोचना की। इसके कुछ घंटों के बाद गठबंधन की बैठक हुई। नेकपा (माओवादी केंद्र) के प्रमुख प्रचंड ने 15 जनवरी 2020 को कहा था कि एक दशक तक चले विद्रोह का नेतृत्व करने वाली माओवादी पार्टी के नेता रूप में वह पांच हजार लोगों की मौत की जिम्मेदारी लेंगे। उन्होंने कहा था कि शेष मौतों की जिम्मेदारी राज्य को लेनी चाहिए। 

प्रचंड ने काठमांडू में माघी उत्सव समारोह को संबोधित करते हुए कहा था, मुझ पर 17,000 लोगों की हत्या का आरोप है, जो सच नहीं है। हालांकि, मैं संघर्ष के दौरान 5,000 लोगों की हत्या की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हूं। उन्होंने आगे कहा था कि बाकी 12,000 लोग सामंती शासन द्वारा मारे गए हैं। वकील ज्ञानेंद्र आरन और कल्याण बुधाथोकी ने सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग रिट याचिकाएं दायर कर मांग की थी कि प्रचंड के बयान की जांच की जाए और उन पर मुकदमा चलाया जाए। 
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हालांकि, प्रशासन ने पिछले साल नवंबर में यह दावा करते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दायर करने से इनकार कर दिया था कि यह मामला संक्रमणकालीन न्याय से जुड़ा है और 'सत्य और सुलह आयोग' इस मामले को देख रहा है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने प्रशासन को विद्रोह के दौरान 5,000 मौतों की जिम्मेदारी लेने के लिए प्रचंड के खिलाफ रिट याचिका दायर करने का आदेश दिया था।

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