बतौर प्रधानमंत्री अपनी पहली पारी में भारत के मुकाबले चीन को तरजीह देने वाले नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल का दूसरी पारी में रुख बदला-बदला सा है। प्रधानमंत्री बनने के तत्काल बाद उपप्रधानमंत्री बिमलेंद्र निधि के माध्यम से प्रचंड की ओर से आए संदेश के बाद भारत को नेपाल के नए संविधान के कारण दोनों देशों के बीच चरम पर पहुंची कूटनीतिक तनातनी में नरमी आने की उम्मीद है।
दरअसल भारत दौरे में निधि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के समक्ष संविधान के कारण बढ़ी दूरी को न सिर्फ पाटने की इच्छा जाहिर की, बल्कि यह भी आश्वासन दिया कि विवाद खत्म करने के लिए इस संदर्भ में भारत की सलाह को नेपाल अहमियत देने के लिए तैयार है।
गौरतलब है कि वर्ष 2008 में पहली बार नेपाल की बागडोर संभालने के बाद प्रचंड ने भारत विरोधी रुख अपनाते हुए चीन से नजदीकी बढ़ाने का सिलसिला शुरू किया था। प्रचंड नेपाल के ऐसे पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने पद संभालने के बाद अपनी पहली यात्रा के लिए भारत के बदले चीन का चुनाव किया था।