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प्रचंड की दूसरी पारी में भारत-नेपाल रिश्तों में नरमी आने की उम्मीद

Mon, 22 Aug 2016 12:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रचंड
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बतौर प्रधानमंत्री अपनी पहली पारी में भारत के मुकाबले चीन को तरजीह देने वाले नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल का दूसरी पारी में रुख बदला-बदला सा है। प्रधानमंत्री बनने के तत्काल बाद उपप्रधानमंत्री बिमलेंद्र निधि के माध्यम से प्रचंड की ओर से आए संदेश के बाद भारत को नेपाल के नए संविधान के कारण दोनों देशों के बीच चरम पर पहुंची कूटनीतिक तनातनी में नरमी आने की उम्मीद है।
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दरअसल भारत दौरे में निधि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के समक्ष संविधान के कारण बढ़ी दूरी को न सिर्फ पाटने की इच्छा जाहिर की, बल्कि यह भी आश्वासन दिया कि विवाद खत्म करने के लिए इस संदर्भ में भारत की सलाह को नेपाल अहमियत देने के लिए तैयार है।

गौरतलब है कि वर्ष 2008 में पहली बार नेपाल की बागडोर संभालने के बाद प्रचंड ने भारत विरोधी रुख अपनाते हुए चीन से नजदीकी बढ़ाने का सिलसिला शुरू किया था। प्रचंड नेपाल के ऐसे पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने पद संभालने के बाद अपनी पहली यात्रा के लिए भारत के बदले चीन का चुनाव किया था।
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भारत के सहयोग से समाधान चाहते हैं प्रचंड

सरकारी सूत्र के मुताबिक प्रचंड का दूत बन कर आए निधि का रुख न सिर्फ बेहद सकारात्मक था, बल्कि यह भी लगा कि अपनी दूसरी पारी में प्रचंड संविधान सहित तमाम विवादित मुद्दों का भारत के सहयोग से समाधान चाहते हैं। निधि ने न सिर्फ संविधान पर भारत के पक्ष को महत्व देने की बात कही, बल्कि विवाद सुलझाने के लिए भारत का सहयोग भी मांगा।

इन मुलाकातों में उन्होंने संविधान पर भारत के पक्ष को खारिज करने के बदले विवाद सुलझाने के लिए शीर्ष स्तर पर नई पहल करने की इच्छा जाहिर की। इस दौरान उन्होंने मधेसियों की नाराजगी और आंदोलन के कारण नेपाल के व्यापार पर पड़े नकारात्मक प्रभाव को दूर करने के लिए भी भारत की मदद मांगी।

चूंकि प्रचंड का रुख बेहद सकारात्मक है। ऐसे में अगले दो-तीन महीने के अंदर दोनों देशों के राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों को एक दूसरे के देश जाने का कार्यक्रम बन सकता है। निधि ने इस क्रम में प्रधानमंत्री मोदी को नेपाल आने का न्यौता दिया है। फिलहाल अब तक की स्थिति के मुताबिक पहले नेपाल के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बारी बारी से भारत की यात्रा पर आएंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के नेपाल जाने का कार्यक्रम तय होगा।
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