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मोदी की नकल कर रहे हैं ओली, 'राष्ट्रवाद' की आड़ में क्या चाहते हैं नेपाली प्रधानमंत्री!

Wed, 15 Jul 2020 07:20 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राष्ट्रवाद के चलते नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने सोमवार को जो विवादित बयान दिया, उसके कारण वे दोनों देशों के लोगों के निशाने पर आ गए। सोमवार को ओली ने कहा था कि भगवान राम का जन्म नेपाल में हुआ था...
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Nepal PM KP Sharma Oli - फोटो : File Photo
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विस्तार
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भारत-चीन के बीच हुए सीमा विवाद के दौरान नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली चर्चा के केंद्र में आ गए। कहा जा रहा है कि नेपाल में 'ओली' प्रधानमंत्री मोदी की नकल कर रहे हैं। खासतौर पर उन्हें मोदी का राष्ट्रवाद बहुत पसंद आया है। इसी के चलते उन्होंने लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी इलाके को नेपाल के नक्शे में दिखा दिया। नतीजा, दशकों से भारत-नेपाल के बीच चले आ रहे मधुर संबंधों में खटास आने लगी।

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ओली यहीं पर नहीं ठहरे, सोमवार को उन्होंने कहा कि 'भगवान राम का जन्म नेपाल में हुआ था। इस बयान पर न केवल नेपाल के बड़े हिस्से में उनकी आलोचना हुई, बल्कि भारत में इस बाबत कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई।

सत्तारूढ़ 'नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी' (एनसीपी) के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्पकमल दहल प्रचंड को ओली के खिलाफ यह बयान देना पड़ा कि कोई भी राष्ट्रवाद के मुद्दे पर एकाधिकार नहीं जता सकता।
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दरअसल, नेपाल में यह बात बड़े पैमाने पर कही जाने लगी है कि ओली 'राष्ट्रवाद' की आड़ में अपनी कुर्सी बचाना चाह रहे हैं।
 

राष्ट्रवाद के चलते नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने सोमवार को जो विवादित बयान दिया, उसके कारण वे दोनों देशों के लोगों के निशाने पर आ गए। सोमवार को ओली ने कहा था कि भगवान राम का जन्म नेपाल में हुआ था।

नेपाल के अनेक लोगों ने कहा कि उन्हें ऐसी टिप्पणी से बचना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और नेपाल के बीच पहले से तनाव चल रहा है। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री बाबू राम भट्टाराई ने अपने ट्वीट में लिखा, 'आदि-कवि ओली की रचित कलयुग की नई रामायण सुनिए, सीधे बैकुंठ धाम की यात्रा करिए'।

इसके साथ ही राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) के चेयरमैन और नेपाल के पूर्व उप-प्रधानमंत्री कमल थापा भी ओली के इस बयान के विरोध में खड़े नजर आए। उन्होंने कहा, किसी भी प्रधानमंत्री के लिए इस तरह का आधारहीन और अप्रमाणित बयान देना उचित नहीं है।

ऐसा लगता है कि पीएम ओली भारत और नेपाल के रिश्ते और बिगाड़ना चाहते हैं, जबकि उन्हें तनाव कम करने के लिए काम करना चाहिए। पूर्व विदेश मंत्री रमेश नाथ पांडे ने अपने ट्वीट में लिखा, धर्म राजनीति और कूटनीति से ऊपर है।

यह एक बड़ा भावनात्मक विषय है। अबूझ भाव और ऐसी बयानबाजी से आप केवल शर्मिंदगी महसूस करते हैं और अगर असली अयोध्या बीरगंज के पास है तो फिर सरयू नदी कहां है।
 

पीएम मोदी ने 2019 में लोकसभा चुनाव से पहले पाकिस्तान के बालाकोट में खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की थी। दूसरी बार मोदी जब पीएम बने तो उन्होंने कश्मीर में अनुच्छेद 370 खत्म कर दिया। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दे दिया गया।

इसके बाद भारत ने अपने नक्शे में परिवर्तन किया। मोदी सरकार के इस कदम ने दुनिया के कई देशों को हैरत में डाल दिया था। अब नेपाली पीएम ओली भी मोदी की नकल करते हुए दिखाई पड़े। नेपाल ने 20 मई को अपना नया नक्शा जारी कर लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को अपना इलाका दिखा दिया।

इस फैसले पर कैबिनेट की मुहर लगवा ली गई और दो जुलाई को संसद का सत्रावसान करने की सिफारिश कर दी। उन्होंने नेपाल में कई भारतीय चैनलों के प्रसारण पर रोक लगा दी। इस बाबत नेपाल सरकार का कहना था कि भारतीय चैनल उसके खिलाफ अपमानजनक कंटेंट दिखा रहे हैं। ये सारे कदम ऐसे थे, जिनसे ओली खुद को एक बड़ा राष्ट्रवादी साबित करने में लगे थे।  

भगवान राम के जन्मस्थान को लेकर दिए गए उनके बयान ने नेपाल और भारत, दोनों देशों में हड़कंप मचा दिया। ओली को अपने इस बयान के कारण खुद अपनी 'नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी' के अंदरूनी असंतोष का सामना करना पड़ा।

पार्टी के वरिष्ठ नेता पुष्पकमल दहल प्रचंड भी खुलकर सामने आ गए। दूसरे नेताओं ने कहा, ओली ने ऐसा बयान देकर खुद को नेपाल की राजनीति में अलग-थलग कर लिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता पुष्पकमल दहाल प्रचंड ने जब उन पर निशाना साधा तो ओली को अपने बचाव में उतरना पड़ा।

ओली ने आरोप लगाया कि उनके विरोधी, पड़ोसी देश भारत के साथ मिलकर सरकार गिराने की कोशिश कर रहे हैं। यह अलग बात है कि नेपाल में कम्युनिस्ट पार्टी के अनेक लोग दोनों देशों के संबंधों में आई खटास के पीछे चीनी राजदूत हाउ यांकी की कथित भूमिका होने की आशंका जाहिर कर चुके हैं।

ओली की बयानबाजी और अपनी कुर्सी बचाने के लिए राष्ट्रवाद का सहारा, इन्हें लेकर उनके मुख्य विरोधी प्रचंड, माधव कुमार, झाला नाथ खनाल और बामदेव गौतम सरीके पार्टी नेताओं ने ओली के इस्तीफे की मांग उठा दी।

ओली के इस राष्ट्रवाद का असर बॉर्डर पर देखने को मिला। नेपाल सीमा से लगते भारत के मधवापुर इलाके में सीमापार से जो लोग सामान लेने आते थे, उनसे अब नेपाली सुरक्षा बल पूछताछ कर रहे हैं।

ऐसे आरोप भी सामने आए हैं कि उन्होंने अपने लोगों से कहा है कि वे सीमा पार यानी भारत से सामान न लाएं। इस बात को लेकर कई सीमावर्ती इलाकों में नेपाल के लोगों और वहां के सुरक्षा बलों के बीच हाथापाई भी हुई है।

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