नेपाल में हिंसा और अस्थिरता की स्थिति के मद्देनजर, केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सशस्त्र सीमा बल' (एसएसबी) अलर्ट पर है। एसएसबी ने भारत-नेपाल के 1751 किमी लंबे खुले बॉर्डर पर हेल्प डेस्क स्थापित किए हैं। यहां पर भारत और नेपाल, दोनों देशों के लोगों की सहायता की जाएगी। नेपाल की तरफ से बॉर्डर पर आने वाले लोगों के पहचान पत्र देखकर उन्हें आगे के लिए रवाना किया जाएगा। कोई संदिग्ध या आपराधिक व्यक्ति, सीमा के पार न आ सके, इसके लिए विशेष सावधानी बरती जा रही है। इस बाबत एसएसबी की इंटेल विंग के अलावा दूसरी सुरक्षा एजेंसियों से भी इनपुट लिए जा रहे हैं। अभी तक ऐसे आठ संदिग्ध लोग हिरासत में लिए गए हैं।
भारत और नेपाल के बीच खुले बॉर्डर की प्रभावशाली तरीके से हिफाजत कर रही एसएसबी ने लोगों के लिए हेल्प डेस्क स्थापित किए हैं। नेपाल की स्थिति के मद्देनजर अगर उस तरफ से कोई भी नेपाली या भारतीय, बॉर्डर पर आता है तो उसकी पूरी मदद की जाती है। एसएसबी के एक अधिकारी के मुताबिक, नेपाल की मौजूदा स्थिति के दौरान वही 'मानक संचालन प्रक्रिया' (एसओपी) अपनाई गई है, जो कोविड के दौरान लागू की गई थी। कोई व्यक्ति, जो किसी तरह से परेशानी में है, वह भारत में आना चाहता है तो उसकी मदद की जाती है।
एसएसबी के हेल्प डेस्क पर कोई भी व्यक्ति आकर मदद ले सकता है, बशर्ते वह आपराधिक तत्व न हो। नेपाली मूल का व्यक्ति है और वह भारत में आना चाहता है तो उसकी पहचान से जुड़े दस्तावेज देखकर उसे सीमा के इस पार आने की इजाजत दे दी जाती है। इस दौरान उस व्यक्ति से यह पूछा जाता है कि वह भारत में कहां पर जाएगा। क्या वह पहले से वहां कोई नौकरी करता है या अपने किसी परिचित के यहां पर ठहरेगा, आदि बातें पूछी जाती हैं। इसके बाद उस व्यक्ति को आगे के लिए रवाना कर दिया जाता है। एसएसबी द्वारा बॉर्डर के संवेदनशील प्वाइंट पर पैनी नजर रखी जा रही है।