दुनिया की दुर्गम पहाड़ी चोटियों पर फतह हासिल कर चुके भारत के एमटैक इंजीनियर राजेश चौधरी को नेपाल सरकार ने माउंट एवरेस्ट पर भारत का झंडा फहराने के लिए चुन लिया है लेकिन अपनों की अनदेखी और प्रशासनिक बेरुखी के चलते उसका यह सपना पूरा नहीं हो पा रहा है। एवरेस्ट पर चढ़ने वाले चुनिंदा लोगों को ही नेपाल सरकार इस बार क्लीन चिट दी है जो राजेश को मिल चुकी है।
राजेश चौधरी हरियाणा में अंबाला के नारायणगढ़ में फतेहपुर गांव का रहने वाला है और दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराने की सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उसके सामने आर्थिक तंगी आड़े आ रही है। एवरेस्ट फतह करने के लिए उसे 25 लाख रुपयों की दरकार है, जिसके लिए राजेश केंद्र और राज्य सरकार से मदद पाने के लिए भटक रहा है।
इस पर्वतारोही ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल, राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी और राज्यमंत्री नायब सैनी को भी पत्र लिखा है। नेपाल सरकार ने उसे अप्रैल में एवरेस्ट की चोटी फतह करने की अनुमति दी है, लेकिन अब तक अपने ही देश में उसे कोई तवज्जो नहीं मिली है।
नेपाल सरकार ने इस साल बहुत कम लोगों को एवरेस्ट पर चढ़ाई की मंजूरी दी है, क्योंकि प्राय: देखा गया है कि दुर्गम पहाड़ी इलाकों में अकुशल पर्वतारोही हादसों का शिकार हो जाते हैं। इसके लिए नेपाल सरकार ने कड़े मापदंड से होकर गुजरने वाले चुनिंदा लोगों को ही इस साल एवरेस्ट फतह की मंजूरी दी है।