भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से जुड़े निजी दस्तावेजों का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। राजधानी दिल्ली के तीन मूर्ति भवन में सोमवार को प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (PMML) सोसाइटी की 47वीं वार्षिक आम बैठक के दौरान यह मुद्दा एक बार फिर उठा। इस बैठक में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए। हालांकि, दस्तावेजों को लेकर कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया, लेकिन एक सदस्य द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद एक बार फिर इसे लेकर बहस शुरू हो गई है।
तीन मूर्ति भवन में आयोजित इस अहम बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। गौरतलब है कि तीन मूर्ति भवन वही ऐतिहासिक इमारत है, जहां पंडित नेहरू ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा बिताया था। उनकी मृत्यु के बाद इसे नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी में बदल दिया गया था, जिसे दो साल पहले प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय के नाम से जाना जाने लगा।
ऐसे उठा निजी दस्तावेज का मामला
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में गुजरात के अहमदाबाद में इतिहास पढ़ाने वाले रिजवान कादरी ने नेहरू से जुड़े निजी दस्तावेजों का मुद्दा उठाया। कादरी लंबे समय से यह मांग करते रहे हैं कि सोनिया गांधी के पास मौजूद नेहरू के निजी कागजात को सार्वजनिक किया जाए। कादरी का दावा है कि कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने वर्षों पहले नेहरू से जुड़े 51 बॉक्स अपने पास रख लिए थे, जिनमें अहम ऐतिहासिक दस्तावेज शामिल हैं।
कादरी ने सोनिया गांधी को लिखा था पत्र
इससे पहले सितंबर 2024 में भी कादरी ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर इन दस्तावेजों को या तो लौटाने या उनकी डिजिटल या भौतिक पहुंच सार्वजनिक करने की मांग की थी। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। यह मुद्दा नेहरू की विरासत, ऐतिहासिक तथ्यों और पारदर्शिता को लेकर उठती रही चर्चाओं को और हवा दे रहा है।
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बैठक में क्या बोले पीएम मोदी
बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश के सभी प्रधानमंत्रियों की विरासत को सहेजने और जनता तक पहुंचाने के लिए 'प्रधानमंत्री संग्रहालय' की स्थापना एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने दावा किया कि 2014 से पहले ऐसा संतुलित प्रयास नहीं हुआ था। मोदी ने देशभर के सभी संग्रहालयों की जानकारी को एक प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए 'म्यूजियम मैप ऑफ इंडिया' बनाने का प्रस्ताव भी रखा।
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सभी संग्रहालयों पर बड़ा फैसला
बैठक में यह भी तय किया गया कि देशभर के सभी संग्रहालयों की एक राष्ट्रीय डिजिटल डाटाबेस तैयार की जाएगी, जिसमें आगंतुकों की संख्या, गुणवत्ता मानक और अन्य अहम सूचनाएं शामिल होंगी। हालांकि, नेहरू के दस्तावेज़ों को लेकर क्या फैसला लिया जाएगा, इस पर तस्वीर अभी साफ नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि यह मुद्दा भविष्य में फिर चर्चा का केंद्र बन सकता है।