पिछले कुछ सालों में भाजपा लगातार अलग-अलग मुद्दों को लेकर नेहरू और उनकी विरासत पर न सिर्फ सवाल उठाती रही है बल्कि हमलावर भी रही है। वहीं, नेहरू मेमोरियल से कांग्रेस नेताओं के बाहर होने से सियासत गरमाने के आसार हैं। फिलहाल राजनीति और भारत से भले ही कांग्रेस को भाजपा मुक्त ना कर पाई हो लेकिन कांग्रेस के सबसे बडे़ नेताओं में से एक पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की विरासत से भाजपा ने कांग्रेस को मुक्त कर ही दिया है।
इससे पहले, केंद्र ने टेलीविजन पत्रकार अर्नब गोस्वामी, पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर, भाजपा विधायक विनय सहस्रबुद्धे और आईजीएनसीए के अध्यक्ष राम बहादुर राय को एनएमएमएल सोसाइटी के सदस्यों के रूप में नियुक्त किया था, जिन्हें उन लोगों के स्थान पर नियुक्त किया गया था जिन्होंने सभी प्रधानमंत्रियों के लिए एक संग्रहालय बनाने के कदम का विरोध किया था।
अभी पिछले महीने ही पूर्व संस्कृति सचिव राघवेंद्र सिंह को शक्ति सिन्हा की जगह अगले छह महीने के लिए एनएमएमएल का निदेशक नियुक्त किया गया था, शक्ति सिन्हा का कार्यकाल चार अक्तूबर को समाप्त हो रहा था। इन नियुक्तियों का महत्व इसलिए भी है क्योंकि सरकार संग्रहालय के एक बड़े सुधार की योजना बना रही है।