नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 10वीं बैठक में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ऐतिहासिक अवसरों को खोने को लेकर भारत के पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि नेहरू चिटगांव को भारत में शामिल नहीं करा पाए और इंदिरा गांधी 1971 में बांग्लादेश बनने के समय पूर्वोत्तर के लिए एक सुरक्षित और चौड़ा कॉरिडोर हासिल करने में विफल रहीं।
आजादी से पहले समृद्ध था असम- सरमा
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि स्वतंत्रता से पहले असम एक समृद्ध राज्य था। वहां की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से ज्यादा थी। उन्होंने बताया कि उस समय डिब्रूगढ़ से लेकर चिटगांव (जो अब बांग्लादेश में है) तक रेलवे लाइन जुड़ी हुई थी और ब्रह्मपुत्र नदी जलमार्ग के रूप में चिटगांव जैसे बंदरगाहों से व्यापार के लिए इस्तेमाल होती थी।
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1947 में बंटवारे से टूटा संपर्क- सरमा
सीएम सरमा ने कहा, 'भारत के बंटवारे ने असम के व्यापारिक संपर्कों को एक झटके में तोड़ दिया। आजादी के बाद असम और पूर्वोत्तर भारत केवल एक संकरे रास्ते 'सिलीगुड़ी कॉरिडोर' या 'चिकन नेक' के जरिए बाकी देश से जुड़े रहे, जो बेहद असुरक्षित है।"
'चिटगांव हिल ट्रैक्ट्स को भारत नहीं मिल सका'
मुख्यमंत्री ने कहा कि चिटगांव हिल ट्रैक्ट्स की आबादी उस समय 97% से अधिक गैर-मुस्लिम थी। वहां के चकमा समुदाय के नेताओं ने 15 अगस्त 1947 को रंगामाटी में भारतीय झंडा भी फहराया था, लेकिन इसके बावजूद यह क्षेत्र पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) को दे दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि नेहरू ने इस पर कोई हस्तक्षेप नहीं किया और इस ऐतिहासिक मौके को गंवा दिया।
1971 में चूकी इंदिरा गांधी की सरकार- हिमंत बिस्व सरमा
सीएम सरमा ने आगे कहा कि 1971 में जब बांग्लादेश बना, तब इंदिरा गांधी के पास एक सुरक्षित और चौड़ा कॉरिडोर बनाने का ऐतिहासिक मौका था, जिससे पूर्वोत्तर भारत को देश से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकता था। 'लेकिन, उस समय भी यह मौका हाथ से निकल गया। इस वजह से पूर्वोत्तर को वैश्विक व्यापार से जोड़ने का सपना अधूरा रह गया।'
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मोदी सरकार में नया बदलाव
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अब असम और पूर्वोत्तर के राज्य इतिहास के कैदी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आज इन राज्यों को 'विकसित भारत' की आर्थिक सीमाओं के रूप में देखा जा रहा है। सरमा ने बताया कि अब पूर्वोत्तर में जलमार्गों को पुनर्जीवित किया जा रहा है, कनेक्टिविटी सुधारी जा रही है और बुनियादी ढांचे पर जोर दिया जा रहा है ताकि असम को दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ व्यापारिक द्वार के रूप में विकसित किया जा सके।
सीएम सरमा ने भविष्य के लिए दिए सुझाव
सीएम सरमा ने जोर दिया कि पूर्वोत्तर की संभावनाओं को पूरी तरह से उपयोग में लाने के लिए कुछ अहम कदम उठाने होंगे। जैसै विशेष ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक कॉरिडोर का निर्माण, जलमार्गों का पुनरुद्धार, महत्वपूर्ण रेलवे नेटवर्क का विस्तार, उद्योगों के लिए फ्रेट सब्सिडी और लॉन्ग हॉल इंसेंटिव, सस्ती और भरोसेमंद बिजली की व्यवस्था। मुख्यमंत्री ने कहा, 'पूर्वोत्तर भारत को सीमांत क्षेत्र नहीं, बल्कि रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में देखना चाहिए। ये राज्य दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए द्वार हैं और मानव संसाधन व संभावनाओं से भरपूर हैं।'