फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रेलवे की लापरवाही: सवा घंटे देर से इंदौर रवाना हुई सुपरफास्ट ट्रेन? कोच अटेंडेंट बोले- दिल्ली में गड़बड़ी...

Sat, 03 May 2025 09:17 PM IST
निर्मल कांत डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

नई दिल्ली से इंदौर जाने वाली त्रिसाप्ताहिक सुपरफास्ट एक्सप्रेस शनिवार को करीब 1 घंटे 15 मिनट देरी से रवाना हुई, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी हुई। ट्रेन की साफ-सफाई, रखरखाव और तकनीकी जांच में देरी के साथ-साथ शौचालयों की बदतर स्थिति, प्लेटफॉर्म पर पानी और बैठने की व्यवस्था न होना यात्रियों की मुख्य शिकायतें रहीं।
विज्ञापन
भारतीय रेलवे - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राजधानी नई दिल्ली से इंदौर के बीच वाया रतलाम होकर चलने वाली त्रिसाप्ताहिक एक्सप्रेस (20958 नई दिल्ली-इंदौर सुपरफास्ट एक्सप्रेस) में सफर करने वाले यात्रियों को शनिवार को परेशानी का सामना करना पड़ा। शाम 7:15 बजे इंदौर के लिए रवाना होनी वाली ये ट्रेन अपने तय समय से करीब 20 मिनट की देरी से प्लेटफॉर्म पर पहुंची। ट्रेन अपने तय समय से 1:15 घटे देरी से इंदौर के लिए रवाना हुई। ट्रेन में मौजूद टीटीई ने 'अमर उजाला डिजिटल' को बताया कि साफ-सफाई, मेंटेनेंस के अलावा चेकिंग और टेस्टिंग के चलते ट्रेन को रवाना होने में देरी हुई है।

विज्ञापन

ट्रेन की देरी से यात्री परेशान - फोटो : अमर उजाला
स्टेशन पर मौजूद इंदौर जाने वाले यात्रियों का कहना है कि सप्ताह में तीन चलने वाली इस ट्रेन में साफ-सफाई से जुड़ी बहुत दिक्कतें हैं। ट्रेन की न धुलाई होती है, न ही ठीक से सफाई होती है। वातानुकूलित प्रथम श्रेणी और वातानुकूलित द्वितीय श्रेणी के शौचायल भी ठीक से साफ नहीं होते है। इसके अलावा, स्लीपर श्रेणी में हालत ज्यादा खराब होते है। रात में कई बार शौचालय में पानी भी खत्म हो जाता है। यात्रियों का कहना था कि प्लेटफॉर्म पर यात्रियों को धूप में परेशान होना पड़ा। यहां उनके लिए बैठने के लिए पर्याप्त बेंच भी मौजूद नहीं थी। इसके अलावा पीने के पानी का भी इंतजाम नहीं था। सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्ग यात्री और महिलाओं को उठाना पड़ी।

ये भी पढे़ं: VSHORADS-NG: इस वायु रक्षा प्रणाली से बढ़ेगी भारत की ताकत; दिन-रात और हर मौसम में सटीक निशाना साधने की क्षमता

ट्रेन स्टेशन पर यात्री - फोटो : अमर उजाला
इन ट्रेनों के लेट होने पर रेलवे अधिकारियों का 'अमर उजाला' से कहना है कि ट्रेन को रवाना किए जाने से पूर्व ट्रेन के इंजन और डिब्बों की जरूरी चेकिंग और टेस्टिंग करना अनिवार्य होती है। इसके बाद ही ट्रेन को अपने गंतव्य के लिए रवाना किया जाता है। शनिवार को भी ट्रेन में कुछ तकनीकी दिक्कतें सामने आई थी। पहले उसे चेक किया गया। इसके बाद साफ-सफाई और जरूरी मेंटेनेंस होने के बाद ही ट्रेन को रवाना किया गया। हमारा हमेशा से प्रयास रहता है कि यात्रियों को कोई परेशानी नहीं हो। जहां तक ट्रेन के साफ-सफाई होने का सवाल है, कई बार ट्रेनों के प्लेटफॉर्म पर खड़े होने के बाद भी साफ-सफाई होती है। हालांकि, अधिकांश बार ट्रेन यार्ड से साफ होकर धुलकर प्लेटफॉर्म पर लगाई जाती हैं। 

ट्रेन यात्री - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली में नहीं होती ठीक से सफाई
ट्रेन में मौजूद सफाई कर्मचारी और कोच अटेंडेंट ने अमर उजाला को बताया कि दिल्ली में ट्रेन की साफ-सफाई ठीक से नहीं होती है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह स्टेशन पर ट्रेनों की ज्यादा भीड़ होना है। हर बार ट्रेन इंदौर से धुलकर साफ होकर दिल्ली के लिए आती है। दिल्ली में दिनभर यार्ड में खड़े रहती है, लेकिन साफ-सफाई के लिए नंबर ही नहीं आ पाता है। इसके चलते शाम इंदौर रवाना होने से पहले प्लेटफार्म पर ही ट्रेन की सफाई होती है। जिस दिन दिल्ली में ट्रेन ठीक से साफ-सफाई के लिए जाती उसी दिन ट्रेन लेट होती ही है। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ता है, क्योंकि उन्हें प्लेटफार्म पर न केवल इतंजार करना पड़ता है, बल्कि अपने गतंव्य में पहुचने में भी देरी होती है।
विज्ञापन

ये भी पढे़ं: Maharashtra: घर में पंखे से लटके मिले महिला और उसकी तीन बेटियों के शव, आत्महत्या की आशंका; जांच में जुटी पुलिस

ट्रेन के कोच भी हो रहे पुराने
यात्रियों का कहना है कि इंदौर से दिल्ली और दिल्ली से इंदौर के बीच एक ही रैक को चलाया जा रहा है। फर्स्ट एसी और सेकेंड एसी के कोच भी बहुत पुराने हो गए है। कुछ कोच के शौचालय भी खराब होते है। जबकि, स्लीपर डिब्बों की हालात तो ज्यादा खराब है। कई स्लीपर कोच में शौचालय में पानी तक की व्यवस्था नहीं होती है। गर्मियों में तो इनके पंखे भी ठीक से काम नहीं करते है। स्लीपर कोच में सवार यात्रियों का कहना है कि इस ट्रेन के स्लीपर कोच में साफ-सफाई ठीक से नहीं होती है। आधी रात में तो पानी भी खत्म हो जाता है। रेलवे कर्मचारियों को भी शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें