नीट पेपर लीक मामले में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी राजनीति गरमाई हुई है। शिवसेना (यूबीटी) ने 'सामना' के जरिए आरोप लगाया कि नया सख्त कानून सिर्फ छलावा है और जब तक पीएम मोदी और अमित शाह जवाबदेही तय नहीं करते, छात्रों का यह गुस्सा शांत नहीं होगा।
नीट पेपर लीक विवाद में बड़ा मोड़ आ गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी बवाल थमा नहीं है। शिवसेना (यूबीटी) ने सोमवार को सरकार पर बड़ा हमला बोला है। अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में पार्टी ने साफ कहा कि यह मुद्दा सिर्फ प्रधान के हटने से खत्म नहीं होने वाला है।
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क्या नया कानून सिर्फ धोखा है?
शिवसेना (यूबीटी) ने सरकार के नए एंटी-पेपर लीक कानून पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सामना में लिखा गया कि 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' छात्रों के साथ केवल एक धोखा है। पार्टी का आरोप है कि कानून वही पुराना है। सरकार ने सिर्फ सजा की अवधि और जुर्माने की राशि बढ़ाई है। नए बिल में 10 साल तक की जेल का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का नियम बनाया गया है।
क्या आंदोलन दबाने के लिए हुआ लाठीचार्ज?
सामना में सरकार के रवैये को बेहद घमंडी बताया गया है। संपादकीय में कहा गया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर डटे छात्रों पर लाठियां भांजी गईं। गृह मंत्री अमित शाह पर सीधे आरोप लगाए गए हैं। पार्टी ने दावा किया है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर लाठीचार्ज करवाया गया। जरूरत पड़ने पर गोली चलाने तक के आदेश दिए गए। गृह मंत्री अपने हाथों में लगे खून से बच नहीं सकते।
क्या अब भी है छात्रों में आक्रोश?
शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि 'बड़े प्रधान' (पीएम मोदी) का शासन देश के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है। छात्र आंदोलन ने दिखा दिया कि जब युवा एक जुट होते हैं, तो बड़ी से बड़ी सत्ता को झुकना पड़ता है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार केवल कानून सख्त करके छात्रों का भरोसा जीत पाएगी या यह लड़ाई और आगे जाएगी।