फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नीट पेपर लीक विवाद: छात्रों पर दर्ज एफआईआर रद्द कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंचा केंद्र, कल की सुनवाई पर सबकी नजर

Mon, 31 Aug 2026 05:45 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की केंद्र की याचिका पर 1 सितंबर को सुनवाई करने पर सहमति दी है; यह सुनवाई ऐसे समय हो रही है जब सीजेपी ने शिक्षक दिवस पर दिल्ली में फिर विरोध मार्च का एलान किया है।

 
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को केंद्र की उस याचिका पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है, जिसमें  नीट परीक्षा पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज  एफआईआर रद्द करने की मांग की गई है। चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलील पर गौर किया। मेहता ने इस मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की थी। दिन की कार्यवाही समाप्त होने के बाद जब पीठ उठने ही वाली थी, तब मेहता ने कहा, 'हम एक Iए (अंतरिम आवेदन) दाखिल करना चाहते हैं। यह एफआईआर रद्द करने से संबंधित उस विरोध प्रदर्शन के बारे में है हम संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर रहे हैं।'

विज्ञापन


समझौते पर कोर्ट ने जताई सहमति
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर पक्षकार आपसी समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, तो उसे कोई समस्या नहीं है। इसके बाद अदालत ने मामले को मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति दे दी। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली में विरोध मार्च का आह्वान किया है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को किए गए उन वादों को पूरा नहीं किया, जिनके तहत समूह को परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ अपना 36 दिन लंबा आंदोलन वापस लेने के लिए राजी किया गया था।

शिक्षक दिवस पर प्रस्तावित है विरोध मार्च
सीजेपी के अनुसार, यह मार्च शिक्षक दिवस पर आयोजित किया जाएगा। मार्च का नेतृत्व उन छात्रों के परिवार करेंगे, जिन्होंने NEET परीक्षा रद्द होने और उसके बाद दोबारा परीक्षा कराए जाने के कारण आत्महत्या कर ली थी। इसके अलावा जुलाई में हुए आंदोलन के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती का सामना करने वाले लोग भी इसमें शामिल होंगे।
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट पहले ही बना चुका है जांच समिति
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान छात्रों के साथ पुलिस की कथित ज्यादती समेत विभिन्न मुद्दों और आरोपों की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया था।

'आपराधिक इतिहास' पर कोर्ट ने दिया था स्पष्टीकरण
3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि छात्र प्रदर्शनकारियों को रिहा करने के अपने आदेश में 'आपराधिक इतिहास' (criminal antecedents) शब्द का इस्तेमाल केवल गंभीर और जघन्य अपराधों में शामिल लोगों के संदर्भ में किया गया था। अदालत ने कहा था कि राज्य सरकारें कानून के अनुसार बाकी छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR बंद कर सकती हैं या उन्हें वापस ले सकती हैं।

केंद्र ने FIR आगे न बढ़ाने की बात कही थी
यह स्पष्टीकरण उस समय आया, जब केंद्र ने कहा था कि वह यह स्पष्टीकरण उस समय आया, जब केंद्र ने कहा था कि वह NEET परीक्षा पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को आगे नहीं बढ़ाने को लेकर 'गंभीर' है। इनमें 20 जुलाई को दिल्ली में संसद की ओर निकाला गया मार्च भी शामिल था। हालांकि, केंद्र ने यह बात उन छात्रों के संदर्भ में कही थी, जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।

संसद मार्च के दौरान हुई थी झड़प
20 जुलाई को दिल्ली में सीजेपी के नेतृत्व में हुए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई थी। सुरक्षाकर्मियों ने संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठियों और आंसू गैस के गोले का इस्तेमाल किया था।

ये भी पढ़ें: दिल्ली में चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म: कानपुर देहात के हैं आरोपी चालक-कंडक्टर, मरम्मत के लिए जा रही थी गाड़ी
विज्ञापन


कई शहरों तक फैल गया था छात्रों का आंदोलन
छात्रों के नेतृत्व में शुरू हुए ये विरोध प्रदर्शन कई शहरों तक फैल गए थे। आंदोलन की प्रमुख मांगों में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी शामिल था। 20 जून को जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह आंदोलन 25 जुलाई को समाप्त किया गया था। आंदोलन तब खत्म हुआ, जब धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया और सरकार ने सीजेपी की अन्य मांगों को भी मान लिया।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें