इस साल जुलाई की 24 तारीख को आयोजित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के दूसरे चरण में कथित तौर पर हुई पेपर लीक की जांच में दखल देने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार किया है। शीर्ष अदालत ने जांच की स्टेटस रिपोर्ट मांगने की गुहार संबंधी इस याचिका को खारिज कर दिया है। इसके अलावा, शीर्ष अदालत ने मामले की निगरानी करने से भी इनकार कर दिया है।
न्यायमूर्ति अनिल आर दवे की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की उस दलील को ध्यान में रखते हुए याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया कि 24 जुलाई को नीट-दो की परीक्षा के ठीक पहले पुलिस को मिले परीक्षा के तय प्रश्नपत्रों के बीच समानता नहीं है।
सीबीएसई का यह भी कहना था कि प्रश्नपत्रों के प्रारूप भी अलग थे। साथ ही पीठ ने इस बात पर भी गौर किया कि जस्टिस लोढ़ा कमेटी ने भी इस मामले की जांच की और कमेटी ने इसमें कुछ भी गलत नहीं पाया। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस लोढ़ा कमेटी को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के क्रियाकलापों पर निगरानी रखने के लिए कहा है।
अनुचित साक्ष्य सामने आने पर जा सकते हैं हाई कोर्ट
पीठ ने याचिकाकर्ता छात्र अंशुल शर्मा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील संजय हेगडे़ की उस गुहार को ठुकरा दिया कि उत्तराखंड पुलिस से जांच की स्थिति रिपोर्ट मंगवाई जाए। पीठ ने साथ ही इस मामले की निगरानी करने से इनकार कर दिया।
पीठ ने कहा कि यह अदालत निगरानी करने के लिए नहीं है। हल्द्वानी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक इस मामले को देख रहे हैं, साथ ही सीबीएसई को अपनी प्रतिष्ठा का ख्याल है। अगर कुछ गलत पाया जाएगा तो वे उचित कार्रवाई करेंगे। पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि अगर जांच के क्रम में कुछ अनुचित साक्ष्य सामने आए तो वह हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
क्या था मामला?
वरिष्ठ वकील हेगडे़ ने कहा कि परीक्षा से पहले बिहार, असम, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के 44 छात्र हल्द्वानी आए थे। परीक्षा के एक दिन पहले इन छात्रों को एक रिसॉर्ट ले जाया गया, जहां इन लोगों के बीच नीट-दो के प्रश्नपत्र वितरित किए गए और सवालों के जवाब व्हाट्सएप के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजे गए।