दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने सरकार पर छात्रों की जिंदगी से खेलने का आरोप लगाया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'जेईई-नीट की परीक्षा के नाम पर लाखों छात्रों की जिंदगी से खेल रही है केंद्र सरकार। मेरी केंद्र से विनती है कि पूरे देश में ये दोनो परीक्षाएं तुरंत रद्द करें और इस साल एडमिशन की वैकल्पिक व्यवस्था करे। अभूतपूर्व संकट के इस समय में अभूतपूर्व कदम से ही समाधान निकलेगा।'
दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा, 'ये सोच कि केवल नीट-जेईई परीक्षा ही एडमिशन का एकमात्र विकल्प है, बेहद संकुचित और अव्यवहारिक सोच है। दुनिया भर में शिक्षण संस्थान एडमिशन के नए नए तरीके अपना रहे हैं। हम भारत में क्यों नहीं कर सकते? बच्चों की जिंदगी प्रवेश परीक्षा के नाम पर दांव पर लगाना कहां की समझदारी है?'
दिल्ली के शिक्षा मंत्री ने आगे कहा, 'आज 21वीं सदी के भारत में हम एक प्रवेश परीक्षा का विकल्प नहीं सोच सकते! यह संभव नहीं है। केवल सरकार की नीयत छात्रों के हित में सोचने की होनी चाहिए नीट-जेईई की जगह सुरक्षित तरीके तो हजार हो सकते हैं।'
क्या है परीक्षा को लेकर विवाद
जेईई की परीक्षा पहले अप्रैल में होने वाली थी लेकिन कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन की वजह से इसे स्थगित करना पड़ा। अब ये परीक्षा एक सितंबर 2020 से 06 सितंबर 2020 तक आयोजित होने जा रही है। वहीं नीट की परीक्षा दो बार स्थगित हो चुकी है। पहले यह परीक्षा तीन मई 2020 को आयोजित की जानी थी। हालांकि देशव्यापी लॉकडाउन की वजह से इसे स्थगित करना पड़ा। इसके बाद अगली तारीख 25 जुलाई 2020 तय की गई। मगर कोरोना के बढ़ते संक्रमण और अभ्यर्थियों एवं उनके अभिभावकों के विरोध के कारण इसे दोबारा स्थगित किया गया। अब ये परीक्षा 13 सितंबर 2020 को होने वाली है। कोरोना वायरस महामारी के चलते छात्र इन परीक्षाओं को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि परीक्षा के कारण उनके स्वास्थ्य पर गलत प्रभाव पड़ा तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल की गई थी। हालांकि न्यायालय ने याचिका को खारिज करके परीक्षा आयोजित कराने को हरी झंडी दे दी।