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देश के बड़े हवाईअड्डों पर पुराने सिस्टम बदलने की मांग: सरकार से बोले AAI के इंजीनियर्स- दिल्ली खतरे की घंटी थी

Mon, 10 Nov 2025 06:08 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

Air Service Glitch In New Delhi: दिल्ली एयरपोर्ट पर हवाई सेवाओं के संचालन में कुछ दिन पहले आई दिक्कतों को लेकर एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के इंजीनियर्स ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने केंद्र सरकार से देश के बड़े हवाईअड्डों पर पुराने सिस्टम बदलने की मांग की है। इसके साथ उन्होंने चेताया कि दिल्ली में जो हुआ वो खतरे की घंटी थी।
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नागरिक उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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विस्तार
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देश के हवाई अड्डों पर उड़ानों की सुरक्षा और संचालन संभालने वाले सिस्टम को आधुनिक बनाने की मांग तेज हो गई है। एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरों के संगठन एयर ट्रैफिक सेफ्टी इलेक्ट्रॉनिक्स पर्सनल एसोसिएशन (एटीएसईपीए) ने सरकार से कहा है कि अब कम्युनिकेशन, नेविगेशन और सर्विलांस (सीएनएस) सिस्टम को तुरंत अपग्रेड किया जाए। यह मांग ऐसे वक्त में आई है जब दिल्ली एयरपोर्ट पर पिछले हफ्ते तकनीकी खराबी के कारण सैकड़ों उड़ानें प्रभावित हुईं।
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पुराने सिस्टम बने परेशानी की जड़
एटीएसईपीए ने नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू को भेजे ईमेल में कहा कि इंजीनियरों के कई बार चेतावनी देने और प्रस्ताव देने के बावजूद सीएनएस सिस्टम के अपग्रेडेशन, बैकअप सिस्टम (रेडंडेंसी) और प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ की सही तैनाती को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई गई। संगठन के अधिकारी योगेन्द्र गौतम ने कहा कि दिल्ली एयरपोर्ट पर हाल की गड़बड़ी ने एक बार फिर दिखा दिया है कि सीएनएस ढांचे की लगातार उपेक्षा की जा रही है। इंजीनियरों की तरफ से दिए गए तकनीकी सुझावों को भी एएआई नेतृत्व की तरफ से नजरअंदाज किया गया।
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'पुराने ऑटोमेशन सिस्टम पर निर्भरता खतरनाक'
एसोसिएशन ने कहा कि एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) के अधिकारी अब ऑटोमेशन पर बहुत ज़्यादा निर्भर हो गए हैं। जब सिस्टम फेल होता है, तो मैनुअल (हाथ से) काम करने से बचते हैं या उसे ठीक से लागू नहीं कर पाते, जिससे गलतियां और देरी होती है। दिल्ली एयरपोर्ट की समस्या भी पुराने स्वचालित संदेश स्विचिंग प्रणाली (एएमएसएस) के कारण हुई, जिसमें रेडंडेंसी यानी बैकअप सिस्टम की सुविधा नहीं थी।

इंजीनियरों की तैनाती पर सवाल
एटीएसईपीए ने आरोप लगाया कि एएआई में कई प्रशिक्षित सीएनएस इंजीनियरों को गैर-तकनीकी कामों में लगा दिया गया है, जबकि जरूरी एयरपोर्ट्स पर स्टाफ की कमी है। संगठन का कहना है कि यदि देश को आधुनिक एविएशन सिस्टम चाहिए, तो इंजीनियरों को केवल तकनीकी कामों में लगाया जाए, उनकी सलाह को उपकरण खरीद और योजना बनाते वक्त शामिल किया जाए और वैश्विक स्तर के प्रशिक्षणदिए जाएं।

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7 नवंबर को फेल हुआ था सिस्टम
7 नवंबर को दिल्ली एयरपोर्ट पर स्वचालित संदेश स्विचिंग प्रणाली (एएमएसएस) में तकनीकी दिक्कत आने से उड़ानों में भारी देरी हुई। इसकी वजह से करीब 800 उड़ानें देरी से चलीं और 46 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। यह सिस्टम इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) की तरफ से बनाया गया है। मंत्रालय के मुताबिक, ईसीआईएल इंजीनियरों, एटीसी स्टाफ और मंत्रालय के अधिकारियों की मदद से 8 नवंबर की दोपहर तक सिस्टम पूरी तरह बहाल कर दिया गया।

नागरिक उड्डयन मंत्री ने जांच के दिए आदेश
नागरिक उड्डयन मंत्री नायडू ने इस तकनीकी गड़बड़ी की रूट-कॉज एनालिसिस (मूल कारण की जांच)के आदेश दिए हैं और बैकअप सर्वर लगानेका निर्देश भी दिया है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने। एटीएसईपीए का कहना है कि अगर सीएनएस सिस्टम को तुरंत आधुनिक नहीं किया गया, तो आने वाले समय में ऐसी तकनीकी गड़बड़ियां देश की हवाई सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं।
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