देश में भूजल का लगातार बढ़ता इस्तेमाल अब भी चिंता का विषय बना हुआ है। सरकार ने राज्यसभा में बताया कि देश की करीब 11 प्रतिशत भूजल आकलन इकाइयों में जितना भूजल हर साल दोबारा जमीन में पहुंचता है, उससे अधिक पानी निकाला जा रहा है। हालांकि राहत की बात यह है कि पिछले आठ वर्षों में देश की कुल भूजल स्थिति में सुधार दर्ज किया गया है। सरकार का कहना है कि जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण से जुड़े कई अभियान इसके पीछे बड़ी वजह हैं।
केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि देश में कुल 6,762 भूजल संसाधन आकलन इकाइयां हैं, जिनमें ब्लॉक, तालुक और मंडल शामिल हैं। इनमें से 730 इकाइयों यानी 10.8 प्रतिशत को ओवर-एक्सप्लॉइटेड श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि इन इलाकों में हर साल जितना भूजल प्राकृतिक रूप से दोबारा भरता है, उससे अधिक पानी निकाला जा रहा है। इसके अलावा 201 इकाइयां क्रिटिकल, 758 सेमी-क्रिटिकल, 4,946 सुरक्षित और 127 खारे पानी वाली श्रेणी में हैं।
किन राज्यों में सबसे ज्यादा भूजल निकाला जा रहा?
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में पंजाब में भूजल दोहन का स्तर सबसे अधिक 156.36 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके बाद राजस्थान 147.11 प्रतिशत और हरियाणा 136.75 प्रतिशत के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। वहीं दिल्ली में स्थिति पहले के मुकाबले बेहतर हुई है। राजधानी में भूजल दोहन का स्तर 2017 में 119.61 प्रतिशत था, जो 2024 में 100.77 प्रतिशत और 2025 में घटकर 92.10 प्रतिशत रह गया। हिमाचल प्रदेश में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जहां यह आंकड़ा 2017 के 86.37 प्रतिशत से घटकर 2025 में 38.50 प्रतिशत हो गया।
देशभर में भूजल की स्थिति में कितना सुधार आया?
सरकार ने बताया कि भूजल दोहन का राष्ट्रीय स्तर 2024 में 60.48 प्रतिशत था, जो 2025 में मामूली बढ़कर 60.63 प्रतिशत हो गया। हालांकि अगर 2017 से तुलना की जाए तो यह आंकड़ा 63.33 प्रतिशत से घटकर 60.63 प्रतिशत पर आ गया है। इसका मतलब है कि लंबे समय में देश की भूजल स्थिति में सुधार हुआ है। सरकार के अनुसार, यह सुधार भूजल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और पुनर्भरण के प्रयासों का परिणाम है।
सरकार भूजल बचाने के लिए क्या कर रही?
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पानी राज्य का विषय है और भूजल का संरक्षण तथा प्रबंधन मुख्य रूप से राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। केंद्र सरकार तकनीकी और वित्तीय सहायता के जरिए राज्यों का सहयोग कर रही है। जल शक्ति अभियान के तहत दो करोड़ से अधिक जल संरक्षण और कृत्रिम भूजल पुनर्भरण के कार्य किए गए हैं। वर्ष 2024 में शुरू की गई जल संचय जन भागीदारी पहल के तहत 1.55 करोड़ से अधिक कृत्रिम भूजल पुनर्भरण और जल भंडारण संरचनाएं बनाई गई हैं। इसके अलावा अटल भूजल योजना सात राज्यों के 80 जिलों की 8,203 जल संकटग्रस्त ग्राम पंचायतों में लागू है।
अमृत सरोवर योजना का कितना असर पड़ा?
सरकार ने बताया कि देशभर में करीब 69,000 अमृत सरोवरों का निर्माण या पुनर्जीवन किया गया है। इनका उद्देश्य वर्षा जल का अधिक से अधिक संग्रह करना, जल भंडारण क्षमता बढ़ाना और भूजल को दोबारा भरने में मदद करना है। सरकार का मानना है कि यदि राज्य और केंद्र मिलकर जल संरक्षण की योजनाओं को इसी तरह आगे बढ़ाते रहे तो आने वाले वर्षों में भूजल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।