आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2024 मंगलवार को चर्चा के बाद राज्यसभा में पारित हो गया है। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा, आपदा प्रबंधन में भारत आज एक ग्लोबल लीडर बन चुका है। मोदी सरकार रिएक्टिव की जगह प्रोएक्टिव अप्रोच और मिनिमम कैज़ुअल्टी की जगह जीरो कैज़ुअल्टी का लक्ष्य रखकर आपदा प्रबंधन कर रही है। वर्तमान में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की 16 बटालियन कार्यरत हैं। बल के जवानों को देखकर लोगों को तसल्ली होती है कि अब वे सुरक्षित हैं। एनडीआरएफ ने दूसरे मुल्कों में भी राहत एवं बचाव ऑपरेशन चलाए हैं। दो लाख से ज्यादा 'आपदा मित्र' तैयार करने की योजना पर काम शुरु हो रहा है। इसके बाद कम्यूनिटी वॉलंटियर्स की कुल संख्या तीन लाख 37 हजार हो जाएगी।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, भूस्खलन जोखिम प्रबंधन, ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड और नागरिक सुरक्षा तथा प्रशिक्षण क्षमता निर्माण के लिए भी कार्यक्रम बनाए गए हैं। एनडीआरएफ ने वसुधैव कुटुंबकम की भावना से वर्ष 2015 में नेपाल में आए भूकंप में 'ऑपरेशन मैत्री', 2018 में इंडोनेशिया में 'ऑपरेशन समुद्र मैत्री', 2023 में तुर्की और सीरिया में 'ऑपरेशन दोस्त', म्यांमार में 'ऑपरेशन करुणा' और वियतनाम में 'ऑपरेशन सद्भाव' चलाया है। इसके चलते इन देशों की सरकारों और जनता ने एनडीआरएफ की भूरी-भूरी प्रशंसा की है। एनडीआरएफ ने राष्ट्रीय स्तर पर हमारे आपदा प्रबंधन तंत्र को स्वीकृति दिलाने का काम किया है।
भारत सरकार ने आपदा प्रबंधन और आपदा जोखिम न्यूनीकरण को पैना बनाने के लिए जापान, ताजिकिस्तान, मंगोलिया, बांग्लादेश, इटली, तुर्कमेनिस्तान, मालदीव और उज्बेकिस्तान के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इन देशों की भौगोलिक परिस्थिति में भी किसी न किसी ऐसी आपदा की आशंका है, जो भारत में भी संभव है। राज्यसभा में चर्चा के दौरान शाह ने कहा, हमने कोशिश की है कि हमारी बेस्ट प्रेक्टिसिस का फायदा इन देशों और उनकी बेस्ट प्रेक्टिसिस का लाभ हमें मिले। समझौता ज्ञापनों के अलावा वर्ष 2015, 2016, 2019, 2020, 2023 में अंतरराष्ट्रीय गोष्ठियां भी आयोजित की गईं, जिनमें सार्क, ब्रिक्स और एससीओ जैसे संगठनों के सदस्य देशों के आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों ने भी हिस्सा लिया।
आपदा-रोधी अवसंरचना गठबंधन, आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भारत के वैश्विक नेतृत्व का उदाहरण है। 23 सितंबर 2019 को न्यूयॉर्क में आयोजित यूएन क्लाइमेट सम्मिट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसका विचार रखा और भारत में ही इसकी स्थापना की गई। अब तक 42 देश और 7 अंतराराष्ट्रीय संगठन गठबंधन की सदस्यता ले चुके हैं। गठबंधन के माध्यम के माध्यम से वैश्विक स्तर पर भारत के नेतृत्व को प्रस्थापित करने का काम हुआ है। अमित शाह ने कहा कि 'आपदा मित्र' योजना के माध्यम से 350 आपदा संभावित जिलों में 370 करोड़ रुपए की लागत से एक लाख कम्यूनिटी वॉलंटियर्स की एक फोर्स बनाई गई है। वॉलंटियर्स को भारत आपदा संसाधन नेटवर्क पोर्टल पर रजिस्टर किया गया है। जिला कलेक्टर के पास उनका पूरा लेखा-जोखा होता है। आपदा आने पर ये वॉलंटियर्स अपने आप वहां पहुंच जाते हैं।
गृह मंत्री ने कहा कि एक लाख 'आपदा मित्र' वॉलंटियर में से 20 प्रतिशत महिलाएं हैं। आपदा प्रबंधन के कार्य में हमारी मातृशक्ति कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि 'आपदा मित्र' योजना के परिणामस्वरूप 78 हजार व्यक्तियों को आपदा से बचाकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। 129 लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाई गई। 'आपदा मित्र' योजना को विस्तार दिया जा रहा है। युवाओं को साथ जोड़ने के लिए 470 करोड़ रुपए के बजट से 1300 से ज्यादा प्रशिक्षित 'आपदा मित्र' को मास्टर ट्रेनर के रुप में रोजगार दिया गया है। इसमें एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र संगठन और भारत स्काउटस एंड गाइड दो लाख 37 हजार 'आपदा मित्र' प्रशिक्षित करेंगे, जिससे कम्यूनिटी वॉलंटियर्स की कुल संख्या तीन लाख 37 हजार हो जाएगी।