देश में आपात स्थिति में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के आसपास सुरक्षा के मजबूत उपाय किए जा रहे हैं। ऑफ-साइट आपातकालीन अभ्यास की प्रणाली विकसित की जा रही है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (एनडीएमपी, 2019) के अनुसार, परमाणु आपात स्थिति के लिए सार्वजनिक डोमेन में प्रतिक्रिया योजना, सर्व-खतरा दृष्टिकोण के अंतर्गत आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए एकीकृत जिला आपदा प्रबंधन योजना (डीडीएमपी) का एक हिस्सा रही है। किसी भी परमाणु और रेडियोलॉजिकल संबंधी आपदाओं के लिए, परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) नोडल एजेंसी है और इसने संकट प्रबंधन योजना (सीएमपी) तैयार की है।
परमाणु और रेडियोलॉजिकल संबंधी आपात स्थितियों के अंतर्गत, संयंत्र आपात स्थिति, स्थल आपात स्थिति और स्थल से बाहर आपात स्थिति जैसी आपात स्थितियां आती हैं। स्थल से बाहर आपात स्थिति में एक बहुत ही असंभावित दुर्घटना की स्थिति या आपात स्थिति शामिल होती है, जिसमें संयंत्र से रेडियोधर्मी पदार्थों या खतरनाक रसायनों का सार्वजनिक डोमेन में अत्यधिक उत्सर्जन होता है और हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है। प्रत्येक परमाणु ऊर्जा संयंत्र (एनपीपी) स्थल पर संयंत्र आपात स्थिति और स्थल आपात स्थिति के लिए, परमाणु ऊर्जा संयंत्र (एनपीपी) के संचालन हेतु लाइसेंस जारी करने हेतु उसकी आपातकालीन तैयारी और प्रतिक्रिया (ईपीआर) योजना एक अनिवार्य आवश्यकता है।
एनडीएमए के दिशानिर्देशों के अनुसार, एनपीपी के साथ समन्वय में, जिला प्रशासन और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) द्वारा उन सभी स्थलों के लिए ऑफ-साइट ईपीआर योजना और सार्वजनिक डोमेन में प्रतिक्रिया क्रियाएं तैयार की जाती हैं, जहां परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थित हैं। तैयारियों के स्तर को और मजबूत करने के लिए, परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) द्वारा ऑफ-साइट आपातकालीन अभ्यास आयोजित करने की एक नई प्रणाली विकसित की जा रही है। आपातकालीन प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए, विभिन्न प्रकार के अभ्यासों की संकल्पना की जाती है और उनका संचालन किया जाता है। पुलिस कर्मी उपरोक्त योजना में हितधारकों में से एक हैं। उन्हें समय-समय पर आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
इसके अलावा एनडीएमए क्षमता निर्माण हेतु सभी हितधारकों के लिए 7 परमाणु संयंत्र स्थलों के आसपास रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (सीबीआरएन) जागरूकता पर एक दिवसीय कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। एनडीएमए ने परमाणु और रेडियोलॉजिकल आपात स्थितियों से संबंधित किसी भी संभावित स्रोत की पहचान करने के लिए देश के 56 शहरों के पुलिस थानों में तीन अलग-अलग प्रकार के गो-नो-गो उपकरण, डोजीमीटर और सर्वे मीटर, उपकरण वितरित किए हैं।
एनडीएमए ने हवाई अड्डों या बंदरगाहों पर सीबीआरएन आपातकालीन प्रशिक्षण भी आयोजित किया है, ताकि आपातकालीन प्रतिक्रियाकर्ताओं को प्रवेश बिंदुओं पर सीबीआरएन आपात स्थितियों के बारे में प्रशिक्षित किया जा सके। अब तक 38 प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं और 1500 से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, 2021-26 की अवधि के लिए स्वीकृत केंद्रीय क्षेत्र योजना 'स्वास्थ्य क्षेत्र आपदा तैयारी और प्रतिक्रिया' के तहत, परमाणु ऊर्जा संयंत्रों (एनपीपी) और आतंकवाद के प्रति संवेदनशील शहरों (जिनमें वे शहर शामिल हैं जहां रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (सीबीआरएन) बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं या योजना बनाई जा रही हैं) की ऑफसाइट योजनाओं में काम करने वाले डॉक्टरों को रेडियोलॉजिकल और परमाणु आपात स्थितियों के चिकित्सा प्रबंधन पर कौशल-आधारित प्रशिक्षण प्रदान करता है।
ये प्रशिक्षण कार्यशालाएं देश भर में सात परमाणु ऊर्जा संयंत्रों (एनपीपी) के माध्यम से भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम (एनपीसीआईएल) के तत्वावधान में की जा रही हैं। 2021 से 15 जुलाई, 2025 तक 30 राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों के कुल 991 स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी है। विकिरण जनित लक्षणों वाले रोगियों के उपचार में समय पर और प्रभावी चिकित्सा प्रतिक्रिया देने में डॉक्टरों की भूमिका को पहले ही मान्यता मिल चुकी है। दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और चेन्नई जैसे शहरों के प्रमुख अस्पताल परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत विकिरण आपातकालीन चिकित्सा नेटवर्क का हिस्सा हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, डॉक्टरों की क्षमता निर्माण हेतु परमाणु और रेडियोलॉजिकल आपातकाल के चिकित्सा प्रबंधन पर समय-समय पर कार्यशालाएं आयोजित करता है। यद्यपि परमाणु सुविधाओं के पास चिकित्सा सुविधाएं और चिकित्सा पेशेवर उपलब्ध हैं, फिर भी सभी प्रमुख शहरों में ऐसे रोगियों के उपचार हेतु सुविधाओं को बढ़ाने के सभी प्रयास किए जा रहे हैं। सार्वजनिक डोमेन में वर्तमान ईपीआर या सीएमपी योजना सुविचारित और अत्यंत सुदृढ़ है तथा इसे एनडीएमए के मार्गदर्शन में एनपीसीआईएल, डीएई और डीडीएमए द्वारा तैयार किया गया है। ऐसा महसूस किया जाता है कि वर्तमान में, कोरिया के विकिरण आपदा अधिनियम के आधार पर मौजूदा ईपीआर योजना को संशोधित करने की कोई आवश्यकता नहीं है।