उत्तरकाशी की सिल्कयारा सुरंग से 41 श्रमिकों को 17 दिन बाद सकुशल निकाल लिया गया। एनडीएमए के एक अधिकारी ने इस अभियान के लिए केंद्र सरकार की तारीफ की है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्रधिकरण के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (रि.) सैयद आता हसनैन ने बताया कि केंद्र ने बेहतर परिचालन, पेशेवर और मानवतावादी दृष्टिकोण अपनाया। इन्हीं उपायों की वजह से बचाव अभियान में सफलता मिली।
दुनिया की सभी उन्नत तकनीक और सलाहकार हमारे साथ मौजूद
एनडीएमए सदस्य हसनैन ने कहा कि अभियान के दौरान दुनिया की सभी उन्नत तकनीक और सलाहकार हमारे साथ मौजूद थे। उन्होंने हमारा साथ दिया। बचाव दल को विश्वास दिलाया कि हम जीतेंगे। हमें बेहतर सलाह दी। हमारा हौसला बढ़ाया। सभी एजेंसियों और टीमों ने साथ मिलकर काम किया। आम लोगों ने भी सेवाएं दीं। भारत सरकार ने बेहद पेशेवर और मानवतावादी दृष्टिकोण अपनाया।
सभी विभागों ने की मेहनत
उन्होंने बताया कि सेना-एनडीआरएफ सहित अन्य संगठनों ने अभियान में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। सबने खूब काम किया। पिछले कुछ घंटों में एनडीआरएफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। एनडीआरएफ की सहायता से सभी मजदूरों को बाहर निकाला गया। रैट माइनर्स और सेना के इंजीनियर्स भी लगे हुए थे। अब श्रमिकों की स्वास्थ्य स्थिति पर करीब से नजर रखी जाएगी। अगले 48 से 72 घंटों तक उनके स्वास्थ्य की देखभाल की जाएगी। अभियान के हर चरणों में हर विभाग ने एकजुट होकर काम किया।
जानिए, स्वास्थ्य प्लान
हसनैन ने आगे बताया कि सुरंग के 60 से 80 मीटर की दूरी पर आठ बिस्तर वाला एक अस्पताल है। श्रमिकों को वहां ले जाया गया है। उनका मेडिकल चेकअप किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच के बाद मजदूरों को एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेजा जा रहा है। जिला अस्पताल मौके से 30 किमी दूर है। अस्पताल के बगल में एक हवाई क्षेत्र है, जहां चिनूक भी खड़ा है। डॉक्टरों के कहने पर उन्हें हेलीकॉप्टर से दूसरे बड़े अस्पताल ले जाया जाएगा। सरकार श्रमिकों के स्वास्थ्य के प्रति गंभीर है। संभावना है कि सभी श्रमिकों को सुबह एम्स ऋषिकेश ले जाया जाएगा, जिसके लिए चिनूक दो बार उड़ान भरेगा। आगे की निगरानी एम्स में ही की जाएगी।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पीएमओ और विभिन्न मंत्रियों और सचिवों ने अभियान में काफी प्रयास किए। पीएम मोदी का खासा महत्व है।