आरटीआई के जवाब में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत 1945 में होने की जानकारी दिए जाने के मामले में शुक्रवार को केंद्र सरकार ने अपना पल्ला झाड़ते हुए इसकी जिम्मेदारी पूर्ववर्ती यूपीए सरकार पर डाल दी। साथ ही सरकार ने कहा है कि अभी यह मामला बंद नहीं हुआ है और कोई नई जानकारी आएगी तो वह इसकी जांच कराएगी।
सरकार का यह स्पष्टीकरण पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और राज्य भाजपा इकाई की तीखी प्रतिक्रिया के बाद आया है। 31 मई को गृह मंत्रालय ने कोलकाता निवासी एक व्यक्ति की ओर से दायर आरटीआई में नेताजी की मौत के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा था कि नेताजी की मौत 18 अगस्त 1945 को विमान दुर्घटना हुई थी। आरटीआई कार्यकर्ता को सरकार द्वारा दिए गए इस जवाब के साथ ही सियासी हलकों में इस बात को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
इस पर सफाई देते हुए गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि आरटीआई के जवाब में सरकार ने नेताजी की मौत के मामले की जांच के लिए गठित शाहनवाज समिति, न्यायमूर्ति जीडी खोसला आयोग और न्यायमूर्ति मुखर्जी आयोग की जांच रिपोर्ट के आधार पर कहा था कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत 18 अगस्त 1945 को विमान हादसे में हुई थी। साथ ही प्रवक्ता ने कहा कि अभी यह मामला अभी बंद नहीं हुआ है।
प्रवक्ता ने कहा, ‘साल 2006 में तत्कालीन संप्रग सरकार ने निष्कर्ष के तौर पर कहा था कि नेताजी की मौत हो चुकी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अब यह मुद्दा खत्म हो गया है। अगर इस बारे में कोई तथ्य सामने आता है तो सरकार गुणदोष के आधार पर इसकी जांच करेगी और इस बारे में कोई उपयुक्त निर्णय किया जाएगा।’
उन्होंने स्पष्ट किया कि आरटीआई का जवाब साल 2006 में तत्कालीन संप्रग सरकार के मंत्रिमंडल के निर्णय पर आधारित था। साथ ही इस बारे में स्थिति को स्पष्ट करते हुए आटीआई आवेदक को नया जवाब भेजा जा रहा है। प्रवक्ता ने कहा कि साल 2006 में संप्रग सरकार मुखर्जी आयोग की 1999 में दी गई रिपोर्ट के आधार पर इस नतीजे पर पहुंची थी कि नेताजी अब जीवित नहीं हैं, क्योंकि उनका जन्म 1897 में हुआ था।