फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नेहा बोरा के बयान पर बवाल: ब्राह्मणवाद के अपमान पर एनडीए हमलावर, आइसा अध्यक्ष को बताया लोकतंत्र के लिए खतरा

Tue, 03 Nov 2026 05:25 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी आईएएनएस, नई दिल्ली

सार

आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा के 'ब्राह्मणवादी व्यवस्था' और धार्मिक संस्थानों पर दिए बयान से सियासी विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा और शिवसेना नेताओं ने उन पर सनातन धर्म का अपमान करने का आरोप लगाया। साथ ही राहुल गांधी को भी निशाने पर लेते हुए पूछा कि उन्होंने बोरा को मंच क्यों दिया।
विज्ञापन
नेहा बोरा, आइसा की अध्यक्ष - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा को "ब्राह्मणवादी व्यवस्था" और धार्मिक संस्थानों पर उनकी टिप्पणियों के लिए एनडीए नेताओं की तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा और शिवसेना नेताओं ने उन पर सनातन धर्म को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की ओर से उन्हें मंच उपलब्ध कराए जाने पर भी सवाल उठाए हैं।

विज्ञापन


प्रदीप भंडारी ने क्या आरोप लगाया?
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि उनके विचारों में राहुल गांधी (जो कांग्रेस सांसद भी हैं) का प्रभाव झलकता है। भंडारी ने कांग्रेस पर हिंदुओं के प्रति शत्रुता रखने का भी आरोप लगाया और दावा किया कि पार्टी का यह रुख देश की एकता के लिए खतरा बन सकता है।


सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर, भंडारी ने बोरा की टिप्पणियों को साझा किया और मंदिरों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राहुल गांधी के एक पुराने बयान से उनकी तुलना की। उनकी इस पोस्ट ने आइसा अध्यक्ष की टिप्पणियों को लेकर हो रही राजनीतिक आलोचना को और बढ़ा दिया।
विज्ञापन


 शाहनवाज हुसैन ने क्या कहा? 
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में बोरा पर आरोप लगाया कि वह लगातार सनातन धर्म और उसके अनुयायियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बोरा की टिप्पणियां एक विशेष धार्मिक समुदाय को निशाना बनाने की उनकी मानसिकता को दर्शाती हैं।

हुसैन ने कहा, 'नेहा बोरा जिस तरह से सनातन धर्म का अपमान करती हैं,जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल करती हैं। उससे लगता है कि उन्हें लगता है कि उनके मन में जो भी आए। वे कह सकती हैं। किसी खास समुदाय और सनातन धर्म के मानने वालों को निशाना बनाना उनकी आदत बन गई है।'

राजनीतिक रुख पर उठाए सवाल
भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने भी बोरा की आलोचना की। उन्होंने इस छात्र नेता के राजनीतिक रुख पर सवाल उठाए और जेल में बंद दो कार्यकर्ताओं के बारे में उनकी बातों पर चिंता जताई। पासवान ने आईएएनएस से कहा, 'नेहा बोरा पहले कहती हैं कि हमने बांग्लादेश से प्रेरणा ली है। फिर वह कहती हैं कि हम शरजील इमाम और उमर खालिद को जेल से बाहर निकालेंगे। कौन है शरजील इमाम? वही, जिसने एक इंटरव्यू में कहा था कि भारत का संविधान एक फासीवादी दस्तावेज है।'

उन्होंने राहुल गांधी पर भी सवाल उठाए कि उन्होंने नेहा बोरा को एक मंच दिया है। उन्होंने पूछा, 'राहुल गांधी ऐसे लोगों को नेता बना रहे हैं जो संविधान को फासीवादी दस्तावेज कहते हैं। वह उन्हें अपने मंच पर जगह दे रहे हैं। वह कह रहे हैं कि रैलियों का नेतृत्व करो। इसलिए, राहुल गांधी को जवाब देना होगा। जो व्यक्ति बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान को फासीवादी दस्तावेज कहता है, उसे सही ठहराने की यह गलत कोशिश क्यों की जा रही है?'

शिवसेना ने क्या कहा? 
शिवसेना नेता आनंद दुबे ने भी इस आलोचना में अपनी बात जोड़ी। उन्होंने कहा कि बोरा के विचारों को देखते हुए उनकी इन टिप्पणियों पर हैरानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि बोरा के पिता उनके विचारों से सहमत नहीं हैं और वे देश को सबसे ऊपर मानते हैं।

दुबे ने मंदिरों और पुजारियों को लेकर बोरा की कथित टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदुओं से जुड़े धार्मिक संस्थानों को ही निशाना बनाया जा रहा है, जबकि मस्जिदों या चर्चों के बारे में ऐसी कोई बात नहीं कही जा रही है। उन्होंने वामपंथी समूहों पर समाज को धार्मिक आधार पर बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाया और कहा कि उनकी सोच विदेशी ताकतों से प्रभावित है।
बिहार के मंत्री संतोष सुमन ने भी इन टिप्पणियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ये बातें उस वैचारिक माहौल को दर्शाती हैं, जिसमें बोरा पली-बढ़ी हैं और प्रभावित हुई हैं।

क्या है पूरा मामला? 
यह विवाद तब शुरू हुआ जब बोरा ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का समर्थन करते हुए ये टिप्पणियां कीं। बोरा ने जाति-आधारित भेदभाव और धार्मिक संस्थानों की भूमिका पर बात करते हुए कहा कि महिलाओं और समाज के अन्य कमजोर वर्गों को उस व्यवस्था से सुरक्षा की जरूरत है, जिसे उन्होंने "ब्राह्मणवादी व्यवस्था" करार दिया। "सुरक्षा बेहद जरूरी है और यह सुरक्षा खास तौर पर ब्राह्मणवादी व्यवस्था से ही चाहिए। यह एक ऐसी व्यवस्था है जो मानती है कि गरीब, शोषित, जानवर और महिलाएं - ये सभी दमन और दुर्व्यवहार के ही लायक हैं। इसी व्यवस्था के तहत ब्राह्मण महिलाएं भी सुरक्षित नहीं हैं। वे दुष्कर्म का शिकार होती हैं। मंदिरों के भीतर पुजारी दुष्कर्म करते हैं। हमने ऐसी घटनाएं देखी हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें