पश्चिम बंगाल में टीएमसी के भीतर बढ़ती बगावत को लेकर एनडीए नेताओं ने ममता बनर्जी पर हमला किया। नेताओं ने इस टूट की वजह पूर्व मुख्यमंत्री के अहंकार बताया है। इसके साथ ही अभिषेक बनर्जी की कथित तानाशाही को जिम्मेदार ठहराया।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में टीएमसी को हार मिली थी। अब एक महीने बाद पार्टी के भीतर बगावत देखने को मिली। इस पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी के अहंकार बताया है। इसके साथ ही पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के तानाशाही व्यवहार को जिम्मेदार ठहराया।
'घर के कार्यकर्ता भी भाग जाएंगे'
'तृणमूल सिर्फ एक राजनीतिक दल नहीं बल्कि....'
'जंगल राज, अवैध घुसपैठ और भ्रष्टाचार' को बढ़ावा दिया
उन्होंने आईएएनएस को बताया, 'राजनीतिक चेतना से कहीं अधिक, पार्टी एक ही परिवार के प्रति समर्पित थी।' अभिषेक बनर्जी को निशाना बनाते हुए शर्मा ने कहा, 'उस परिवार के एक सदस्य ने न केवल राजनीतिक दल का शोषण किया बल्कि अपने फायदे के लिए समाज के सभी वर्गों के साथ अन्याय भी किया।' उन्होंने आगे कहा कि तृणमूल नेताओं के एक वर्ग में असंतोष उस व्यवस्था के प्रति असंतोष का परिणाम है, जिसने पश्चिम बंगाल में 'जंगल राज, अवैध घुसपैठ और भ्रष्टाचार' को बढ़ावा दिया।
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उत्तर प्रदेश के मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने भी इसी तरह का विचार व्यक्त करते हुए कहा 'तृणमूल में व्याप्त तानाशाही, हिटलर जैसी मानसिकता और गुंडागर्दी से तंग आ चुके लोग पार्टी से अलग हो गए हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'मतदाता भी दूर हो गए हैं। अब जब भाजपा सरकार आ गई है, तो वहां के नेता तृणमूल कांग्रेस के साथ नहीं रहना चाहते। वे राज्य में बदलाव चाहते हैं, इसलिए वे पार्टी छोड़ रहे हैं और अपना अलग गुट बना रहे हैं।'
'तृणमूल कांग्रेस का नाम मिटा देना चाहिए'
पश्चिम बंगाल के मंत्री और भाजपा नेता दिलीप घोष ने टिप्पणी की यही पार्टी का भविष्य था। उन्होंने पत्रकारों से कहा 'तृणमूल कांग्रेस का नाम मिटा देना चाहिए। उस पर बुलडोजर चला देना चाहिए। इस नाम ने पिछले 15 वर्षों से बंगाल को बर्बाद कर दिया है। लोग इसे न तो सुनना चाहते हैं और न ही देखना चाहते हैं।'