केंद्र सरकार की ओर से शनिवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में राजग के सहयोगी दलों ने सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद की। सरकार की सहयोगी और अपना दल की सांसद अनुप्रिया पटेल ने अन्य पिछड़ी जातियों (ओबीसी) के लिए अलग मंत्रालय के गठन में देरी पर निराशा जाहिर करते हुए अखिल भारतीय न्यायिक सेवा का गठन कर उच्च न्यायपालिका में आरक्षण की मांग की।
वहीं, केंद्रीय मंत्री और आरपीआई (ए) के अध्यक्ष रामदास अठावले ने 2021 की जनगणना में अलग-अलग जातियों की गणना की मांग की। अनुप्रिया ने कहा, ओबीसी मंत्रालय की मांग अरसे से हो रही है। इसके तहत बड़ी आबादी के आने और कई जिम्मेदारियों के कारण सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ओबीसी के हितों की पूरी तरह से रक्षा नहीं कर पाता।
उन्होंने कहा, अलग मंत्रालय का गठन नहीं होने के कारण ही ओबीसी का प्रतिनिधित्व उच्च न्यायपालिका, नौकरशाही, पीएसयू और सचिव स्तर के अधिकारी वर्ग में लगभग नगण्य है। उन्होंने न्यायिक सेवा का गठन की मांग करते हुए कहा कि न्यायपालिका में जजों की कमी और सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का यही अंतिम विकल्प है। बैठक में अठावले ने कहा, जाति आधारित जनगणना की मांग अरसे से हो रही है। किसी को नहीं पता कि किस जातियों की कितनी आबादी है। इसके कारण आरक्षण के संबंध में भी कई तरह की परेशानी आ रही है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह राष्ट्रीय जनगणना में जातियों की अलग से गिनती कराए।
बीजद ने की महिला आरक्षण की मांग
बीजद के पिनाकी मिश्रा ने दशकों बाद भी संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी भागीदारी देने वाला कानून नहीं बनने पर निराशा जाहिर की। उन्होंने कहा, वर्तमान सरकार के पास बहुमत है। इसके अलावा कई दल इससे जुड़े बिल के समर्थन में हैं। ऐसे में सरकार को तत्काल महिला आरक्षण बिल पेश करना चाहिए।
अलग-अलग मांग
इस बैठक में कांग्रेस, वाम दलों ने डीजल-पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी, अर्थव्यवस्था की खस्ता हालत, चीन से सीमा विवाद, महंगाई जैसे मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की। शिवसेना के विनायक राउत ने मराठा आरक्षण की राह की रुकावटों को दूर करने की मांग की। डीएमके के टीआर बालू ने बीडीएस और एमबीबीएस दाखिले में 50 फीसदी आरक्षण बहाल करने की मांग की।
छोटे दलों की समय दिए जाने की मांग पर पीएम की चुटकी
बैठक में छोटे दलों ने कार्यवाही के दौरान अपनी बात रखने का समय नहीं मिलने का मामला उठाया। ऐसे दलों के नेताओं का कहना था कि विभिन्न चर्चाओं में ज्यादातर समय बड़े दलों को मिलता है। चर्चा के दौरान हंगामे के कारण स्पीकर छोटे दलों से एक-दो मिनट में अपनी बात रखने का निर्देश देते हैं। इस पर पीएम नरेंद्र मोदी ने चुटकी लेते हुए कहा कि मामला वाकई बेहद गंभीर है। मगर इसके लिए छोटे दलों को बड़े दलों से हंगामा नहीं करने और कार्रवाई चलने देने का आग्रह करना होगा।
तय समय से दो दिन पहले खत्म होगा सत्र का पहला हिस्सा
बजट सत्र का पहला हिस्सा 15 फरवरी की जगह 13 फरवरी को ही खत्म हो जाएगा। सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार को हुई कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में स्पीकर ओम बिरला ने इस आशय का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। स्पीकर ने कहा कि 15 फरवरी को सोमवार है। ऐसे में 13 फरवरी को शनिवार के दिन सदन चला कर इसी दिन पहले हिस्से को खत्म कर देना चाहिए।
लोजपा और रालोपा नहीं हुई शामिल
बताया जा रहा है कि सर्वदलीय बैठक में लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) ने हिस्सा नहीं लिया। लोजपा प्रमुख चिराग पासवान की तबीयत खराब बताई जा रही है। वहीं, रालोपा के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने कहा, हम सर्वदलीय बैठक में हिस्सा नहीं ले रहे हैं। उन्होंने कहा, किसानों के आंदोलन के प्रति समर्थन जताने के लिए यह फैसला किया।