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NCRB: छह साल में 96 फीसदी बढ़े बच्चों से दुष्कर्म के मामले, जन जागरूकता में सुधार के बाद से दर्ज कराए अधिक केस

Mon, 29 Jan 2024 07:18 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

चाइल्ड राइट्स एंड यू (क्राई) में अनुसंधान और ज्ञान विनिमय के निदेशक शुभेंदु भट्टाचार्जी ने कहा कि जन जागरूकता में सुधार के बाद बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के अधिक मामले दर्ज कराए गए हैं।
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एनसीआरबी
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विस्तार
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साल 2016 से 2022 तक बच्चों से दुष्कर्म के मामले 96 फीसदी बढ़े हैं। बाल अधिकारों के गैर सरकारी संगठन क्राई की ओर से राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के विश्लेषण के बाद यह बात सामने आई है।

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चाइल्ड राइट्स एंड यू (क्राई) में अनुसंधान और ज्ञान विनिमय के निदेशक शुभेंदु भट्टाचार्जी ने कहा कि जन जागरूकता में सुधार के बाद बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के अधिक मामले दर्ज कराए गए हैं। वहीं, इस संबंध में हेल्पलाइन, ऑनलाइन पोर्टलों और विशेष एजेंसियों के माध्यम से पीड़ित और उनके परिजन रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए आगे आए हैं। क्राई की ओर से किए गए विश्लेषण से पता चलता है कि अकेले 2021 और 2022 के बीच इन मामलों में 6.9 फीसदी की वृद्धि हुई थी।

अकेले 2022 में 38,911 केस
विश्लेषण के मुताबिक, अकेले 2022 में बच्चों से दुष्कर्म के 38,911 मामले दर्ज किए गए हैं, जो पूर्व के वर्षों में दर्ज मामलों में वृद्धि को दर्शाता है। 2020 में यह संख्या 30,705 और 2019 में 31,132 थी। वहीं, साल 2018 में 30,917 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2017 में यह संख्या 27,616 थी। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2016 में 19,765 दर्ज मामले सामने आए हैं।
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खुलकर चर्चा करने से खत्म हुई सामाजिक चुप्पी की प्रथा
भट्टाचार्जी ने कहा कि बाल यौन शोषण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर चर्चा करने से सामाजिक चुप्पी की प्रथा खत्म हुई है। बाल यौन शोषण के बारे में खुली बातचीत को प्रोत्साहित करने और बगैर किसी डर के बोलने से दुर्व्यवहार के खिलाफ अधिक रिपोर्ट दर्ज कराई गई हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनी आवश्यकताओं के साथ संरेखित करने के लिए सुरक्षात्मक उपाय, बाल संरक्षण सुनिश्चित करने वाले मजबूत कानून बनाना इस संबंध में आवश्यक कदम है।

बहुआयामी रणनीति की आवश्यकता
भट्टाचार्जी ने बच्चों को लक्षित करने वाले यौन अपराधों के खिलाफ कानून को मजबूत करने और मीडिया कवरेज व नागरिक समाज संगठनों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की। गरीबी, आजीविका की कमी, सामाजिक मानदंडों जैसे अंतर्निहित सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक कारकों की ओर इशारा करते हुए भट्टाचार्जी ने बच्चों के खिलाफ अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एक बहुआयामी रणनीति की आवश्यकता पर जोर दिया।

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