महाराष्ट्र के जलगांव जिले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के एमएलसी एकनाथ खडसे और उनकी बेटी शारदा के खिलाफ सोमवार को धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज किया गया। खडसे और उनकी बेटी पर एक बुजुर्ग महिला को कथित तौर पर धोखा देने और जालसाजी के जरिए उनकी जमीन पर कब्जाने का आरोप लगा है।
पुलिस के अनुसार, यह जमीन 'महार वतन' श्रेणी की थी, जिसका अवैध कब्जा पूर्व राज्य मंत्री खडसे की बेटी शारदा ने 82 वर्षीय महिला से लिया था। महार वतन भूमि महाराष्ट्र में महार समुदाय को पारंपरिक सेवाओं के बदले सरकार द्वारा दी जाती है। इन जमीनों की बिक्री या हस्तांतरण के लिए कलेक्टर की पूर्व अनुमति जरूरी है। अन्यथा यह अवैध मानी जाती है और सरकार इसे वापस ले सकती है।
पीड़िता की शिकायत पर कार्रवाई
यह कथित धोखाधड़ी तब सामने आई, जब पीड़िता चमेलीबाई तुकाराम तायडे ने नौ मार्च को जलगांव जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) के समक्ष खडसे, उनकी बेटी शारदा और अन्य सरकारी अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने 2002 से 2025 के बीच हुए इस लेन-देन की शिकायत पर प्रारंभिक जांच की। जांच के बाद पुलिस ने खडसे और उनकी बेटी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया, क्योंकि पीड़ित दलित समुदाय से हैं।
क्या है पूरा मामला?
शिकायत के अनुसार, खडसे ने 2002 में पीड़िता और उनके परिवार को उत्तर महाराष्ट्र के जलगांव जिले के मनपुर शिवर स्थित उनकी 'महार वतन' भूमि पर एक चीनी कारखाना स्थापित करने के संबंध में झूठे आश्वासन दिए थे। वरिष्ठ राजनेता, जो पूर्व भाजपा मंत्री भी रह चुके हैं, ने शिकायतकर्ता के परिवार के सदस्यों को अच्छा मुआवजा और रोजगार के अवसर देने का वादा किया था।
जमीन खरीदने का फैसला करने के बाद विधायक ने पीड़ित को 51,000 रुपये दिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रस्तावित चीनी कारखाने के प्रबंधन से उनके परिवार के प्रत्येक सदस्य को एक लाख रुपये मिलेंगे।
जालसाजी और अनधिकृत कब्जा
वर्ष 2025 में यह बात सामने आई कि जमीन पर कोई चीनी कारखाना स्थापित नहीं किया गया था। खडसे ने परियोजना को क्रियान्वित करने के लिए 'तापी-पूर्णा शुगर एलाइड इंडस्ट्रीज लिमिटेड' नामक एक कंपनी स्थापित की और दस्तावेजों में हेरफेर कर जमीन पर कब्जा कर लिया। एफआईआर के अनुसार, विपक्षी एमएलसी ने बिक्री समझौतों में हेरफेर किया और अनधिकृत तरीके से जमीन को अपनी बेटी के नाम स्थानांतरित कर दिया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि खडसे और अन्य ने उसके खिलाफ साजिश रची। उन्होंने महिला और उसके परिवार की अशिक्षा का फायदा उठाकर और उनकी जानकारी के बिना 2002 से 2025 के बीच जमीन पर कब्जा कर लिया।
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