सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि वह 2022 से रुके राज्य के स्थानीय निकाय चुनावों को बिना किसी और विस्तार के 31 जनवरी 2026 तक पूरा करे। चुनाव न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की थी। इस पर एनसीपी-शरद ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार और राज्य चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट के आदेश का तत्काल पालन करे।
महाराष्ट्र निकाय चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य के राजनीतिक दल सतर्क हो गए हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-शरद) ने कहा है कि महाराष्ट्र सरकार और राज्य चुनाव आयोग निकाय चुनाव कराने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का तत्काल पालन करें। पार्टी के प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो ने कहा कि यदि वे एक बार फिर विफल होते हैं, तो कोर्ट को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि वह 2022 से रुके राज्य के स्थानीय निकाय चुनावों को बिना किसी और विस्तार के 31 जनवरी 2026 तक पूरा करे। चुनाव न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की थी।
एक्स पर एक पोस्ट में एनसीपी के प्रवक्ता क्रैस्टो ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार और एसईसी ने पहले छह मई को जारी किए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनादर किया था। इसमें चार सप्ताह के भीतर स्थानीय निकाय चुनावों को अधिसूचित करने और चार महीने के भीतर चुनाव कराने का आदेश दिया गया था।
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एनसीपी प्रवक्ता ने कहा कि अब सर्वोच्च निकाय ने राज्य चुनाव आयोग को बिना किसी और विस्तार के 31 जनवरी 2026 तक की समय सीमा दी है। भाजपा नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार और ईसीआई को तुरंत आदेश का पालन करना चाहिए। अगर वे एक बार फिर इसे लागू करने में विफल रहते हैं, तो सुप्रीम कोर्ट को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। क्या भाजपा चुनावों से डरती है? उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग को शीर्ष अदालत के निर्देशानुसार समय पर चुनाव कराना चाहिए, अन्यथा भाजपा के प्रभाव का संदेह और मजबूत होता जाएगा।
कोर्ट ने क्या कहा
महाराष्ट्र निकाय चुनाव को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि जिला परिषदों, पंचायत समितियों और सभी नगर पालिकाओं सहित सभी स्थानीय निकायों के चुनाव 31 जनवरी, 2026 तक करा लिए जाएंगे। राज्य और राज्य चुनाव आयोग को इसके बाद कोई विस्तार नहीं दिया जाएगा। महाराष्ट्र में नगरपालिका परिषदों, नगर पंचायतों और नगर निगमों के सदस्यों के चयन के लिए अंतिम बार 2017 में स्थानीय चुनाव हुए थे।