राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख औ पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने शनिवार को किसान आंदोलन का समाधान निकालने के लिए सरकार को सलाह दी है। उन्होंने केंद्र सरकार को सलाह देते हुए कहा है कि किसानों से बात करने के लिए प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री या फिर नितिन गडकरी जैसे प्रमुख नेताओं को आगे आना चाहिए। ऐसा होने पर समाधान निकल सकता है। उन्होंने कहा कि यदि वरिष्ठ नेता पहल करते हैं तो किसान नेताओं को भी उनके साथ बैठकर बात करने से परहेज नहीं होगा।
इसके साथ ही शरद पवार ने महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि कई भारतीय हस्तियों ने इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी है। पवार ने कहा कि मैं सचिन (तेंदुलकर) को सलाह दूंगा कि वे किसी अन्य क्षेत्र के बारे में बोलते हुए सावधानी बरतें।
सचिन को सावधानी बरतने की सलाह
दरअसल, क्रिकेट का भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने हाल ही में ट्वीट कर कहा था कि किसान आंदोलन में बाहरी ताकतों को दखल नहीं करना चाहिए। भारतीय ही भारतीयों के बारे में सोचने में सक्षम हैं। तेंदुलकर के इसी ट्वीट पर अब पवार ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने सचिन को अपने क्षेत्र को छोड़कर किसी अलग विषय पर बोलने में सावधानी बरतने की सलाह दी है।
शरद पवार ने शनिवार को पुणे में पत्रकारों से बात करते हुए सचिन तेंदुलकर और लता मंगेश्कर के किसान आंदोलन को लेकर दिए बयान पर नाम लिए बिना कहा कि इसे लेकर (आंदोलन) जो राय इन्होंने रखी है, उससे जनता में नाराजगी है। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन को बदनाम करने के लिए सत्ताधारी दल के नेता कभी आंदोलनकारियों को खालिस्तानी कहते हैं तो कभी कुछ और कहकर बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।
एनसीपी सुप्रीमो ने कहा कि सरकार किसी वरिष्ठ नेता को ये जिम्मेदारी सौंपती है तो किसानों को भी गंभीरता से बात करनी चाहिए। किसानों को दिल्ली में प्रवेश करने से रोकने के लिए सड़क पर नुकीली कील लगाए जाने को लेकर उन्होंने कहा कि आजादी के बाद ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है।
अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के किसान आंदोलन पर ट्वीट करने को लेकर पूछे गए सवाल पर पवार ने कहा कि इतने महीने बाद भी कोई किसानों की सुधि नहीं ले रहा। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता होना स्वाभाविक है। उन्होंने साथ ही यह भी जोड़ा कि पीएम मोदी ने कहा था अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ही होंगे। तब अमेरिका के कुछ लोगों को अच्छा लगा था तो कुछ को बुरा भी। अब वहां से किसानों के लिए समर्थन स्वाभाविक है।