राकांपा ने एक बार फिर विपक्षी एकता की वकालत की है। उनका कहना है कि मोदी सरकार के खिलाफ सभी को एक साथ आना होगा। एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम के तहत सभी को एक साथ आने और मोदी सरकार का मुकाबला करने के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत एक साथ चुनाव लड़ने पर विचार कर सकते हैं।
इससे पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने सोमवार को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने दावा किया था कि उनकी सरकार ने अपना एक भी वादा पूरा नहीं किया। भाजपा का मकसद केवल छोटे दलों को सत्ता से बाहर करना है।
उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार ने 2014 के आम चुनाव के समय से कई वादे किए, लेकिन पूरा एक भी नहीं किया। आम गैर-भाजपा दलों को एक साथ लाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, वह अपनी उम्र के कारण कोई जिम्मेदारी लेना नहीं चाहते हैं। ऐसे में आज एक बार फिर उनका विपक्षी एकता की वकालत करना नए सियासी समीकरण की ओर इशारा कर रहे हैं।
राष्ट्रपति उम्मीदवार बनने से किया था मना
इससे पहले शरद पवार ने विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति उम्मीदवार बनने से मना कर दिया था। दरअसल, राष्ट्रपति चुनाव से पहले 15 जून को विपक्ष की एक बड़ी बैठक हुई थी। इसमें 17 राजनीतिक दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया था।
ममता ने कहा था- शरद पवार के नाम पर पूरा विपक्ष एकजुट
बैठक के बाद तृणमूल कांग्रेस की मुखिया और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने साफ कहा था कि अगर एनसीपी प्रमुख शरद पवार हां करें तो उन्हें विपक्ष की तरफ से राष्ट्रपति का उम्मीदवार बना दिया जाएगा। शरद पवार के नाम पर पूरा विपक्ष एकजुट है। इस पर शरद पवार ने कहा था कि वह राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों की दौड़ में नहीं हैं।