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अजित पवार के बाद राकांपा का क्या होगा: शरद गुट से होगी सुलह या नया रास्ता अपनाएगी पार्टी, कौन होगा नया चेहरा?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 28 Jan 2026 02:39 PM IST

सार

राकांपा का आगे क्या होगा? क्या अजित पवार के बिना संभल सकती है राकांपा? अजित और शरद पवार के बीच चल रही सुलह की कोशिशों का क्या होगा? राकांपा का नया चेहरा कौन होगा? राकांपा की तरफ से डिप्टी सीएम कौन हो सकता है? आइये जानते हैं...
 
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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) में अब भविष्य को लेकर अटकलें। - फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के मुखिया और महाराष्ट्र के छह बार के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बुधवार सुबह एक विमान हादसे में निधन हो गया। सियासत में अजित पवार की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे महाराष्ट्र में सबसे लंबे समय तक उपमुख्यमंत्री रहने वाले नेता हैं। हालांकि, उनके निधन के बाद अब उनके नेतृत्व वाली राकांपा के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। 

राकांपा का आगे क्या होगा? क्या अजित पवार के बिना संभल सकती है राकांपा? अजित और शरद पवार के बीच चल रही सुलह की कोशिशों का क्या होगा? राकांपा का नया चेहरा कौन होगा? राकांपा की तरफ से डिप्टी सीएम कौन हो सकता है? आइये जानते हैं...
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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) में अब भविष्य को लेकर अटकलें। - फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के मुखिया और महाराष्ट्र के छह बार के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बुधवार सुबह एक विमान हादसे में निधन हो गया। सियासत में अजित पवार की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे महाराष्ट्र में सबसे लंबे समय तक उपमुख्यमंत्री रहने वाले नेता हैं। हालांकि, उनके निधन के बाद अब उनके नेतृत्व वाली राकांपा के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। 

राकांपा का आगे क्या होगा? क्या अजित पवार के बिना संभल सकती है राकांपा? अजित और शरद पवार के बीच चल रही सुलह की कोशिशों का क्या होगा? राकांपा का नया चेहरा कौन होगा? राकांपा की तरफ से डिप्टी सीएम कौन हो सकता है? आइये जानते हैं...

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का आगे क्या होगा?

विमान हादसे में राकांपा प्रमुख के असामयिक निधन के बाद राकांपा का भविष्य अनिश्चितता और राजनीतिक संकट के दौर में है। 

1. नेतृत्व और उत्तराधिकार को लेकर क्या चुनौती
अजीत पवार के गुट (जिसे चुनाव आयोग ने आधिकारिक राकांपा माना है) के पास महाराष्ट्र विधानसभा में मौजूदा समय में 41 विधायक हैं। इसके अलावा पार्टी का लोकसभा में एक सांसद भी है। ऐसे में उनके उत्तराधिकारी को लेकर कई संभावनाएं हैं...

उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार (राज्यसभा सांसद) या उनके बेटों- पार्थ और जय पवार को उनकी विरासत संभालने के लिए आगे लाया जा सकता है। हालांकि, पार्थ पवार पहले चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उन्हें चुनाव में हार मिली थी। इसके बाद से ही वे महाराष्ट्र की राजनीति में उतने सक्रिय नहीं रहे हैं, ऐसे में उनमें अपने पिता जैसी राजनीतिक कुशलता और जमीनी पकड़ जैसे कौशलों को लेकर अभी कुछ अनसुलझे सवाल हैं।

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2. जो राकांपा टूटकर अलग हुई, उसके विलय की क्या संभावना
  • अजित पवार के निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों- राकांपा और राकांपा (एसपी) के विलय की अटकलें तेज हो गई हैं। 
  • हाल ही में इसके संकेत भी मिले हैं। कुछ दिन पहले ही दोनों गुटों ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निकाय चुनावों के लिए गठबंधन कर चुनाव लड़ा था।
  • माना जा रहा है कि शरद पवार अपने पोते (पार्थ और जय) और अजित गुट के नेताओं को फिर से साथ लाकर पार्टी को एकजुट करने का प्रयास कर सकते हैं। 
  • सूत्रों का दावा है कि दोनों गुटों को साथ लाने की कोशिश जारी थी। इसे लेकर अजित और शरद पवार के बीच चर्चा भी हुई थी। यहां तक कि शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने भी हाल ही में दोनों दलों के साथ आने का दावा किया था। 

3. क्या शरद पवार निभाएंगे भतीजे की राकांपा में कोई भूमिका?
मूल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, जिसके बाद में दो हिस्से हुए, उसकी स्थापना शरद पवार की ओर से की गई थी। मौजूदा समय में अजित पवार की राकांपा में जो चेहरे हैं, वे भी कभी शरद पवार के करीबी और उनकी पार्टी के नेता रहे हैं। ऐसे में शरद पवार, जिन्होंने 2026 के अंत तक राजनीति से अलग होने का संकेत दिया था, वह अब अपनी योजना में बदलाव पर विचार कर सकते हैं। खासकर पवार साम्राज्य को स्थिरता देने और सुप्रिया सुले और परिवार की अगली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए वे दोनों गुटों को एक करने की कोशिश कर सकते हैं।




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4. अगली पीढ़ी का रास्ता कैसा?
  • राकांपा में अजित पवार के अलावा उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार, बेटा पार्थ पवार और जय पवार हैं। जहां सुनेत्रा पवार बारामती से लोकसभा चुनाव हार चुकी हैं और फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं, तो वहीं पार्थ पवार ने भी विधानसभा चुनाव में हार के साथ शुरुआत की थी। दूसरी तरफ जय पवार अब तक राजनीति से अलग रहे हैं। 
  • दूसरी तरफ राकांपा (एसपी) की ओर से शरद पवार के बाद सुप्रिया सुले उनकी विरासत की उत्तराधिकारी, जबकि रोहित पवार उभरते सितारे के तौर पर देखे जाते हैं। ऐसे में शरद गुट के लिए भी राकांपा पर नियंत्रण और फिर अजित के बराबर का नेता ढूंढना मुश्किल होगा। 

5. राकांपा की कमजोरी का महायुति गठबंधन पर प्रभाव
अजित पवार के बिना उनके गुट के विधायकों की स्थिति कमजोर हो सकती है। बिना किसी मजबूत नेतृत्व के, इन विधायकों पर शरद पवार के गुट में वापस लौटने का राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है, जिससे मौजूदा महायुति सरकार (भाजपा, शिंदे शिवसेना, और राकांपा) की स्थिरता पर असर पड़ सकता है। पहले ही राकांपा और राकांपा-एसपी के बीच विलय की चर्चाओं के बीच यह सवाल खड़ा हो चुका था कि अगर ऐसा होता है तो इससे महायुति और महा विकास अघाड़ी किस पर असर पड़ सकता है।
 

कौन बन सकता है राकांपा का चेहरा और डिप्टी सीएम पद का दावेदार?

1. सुनेत्रा पवार 
अजित पवार की पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार को इस पद के लिए एक मजबूत दावेदार माना जा रहा है। हालांकि, सुप्रिया के पास सियासी अनुभव की कमी है साथ ही अजित पवार जैसा जनसमर्थन भी नहीं है। 
 
2. पार्थ पवार 
अजीत पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार का नाम भी राकांपा के चेहरे के लिए चर्चा में है। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में वे भी जीत हासिल नहीं कर पाए थे। इसके बाद से ही वे राजनीति में कम सक्रिय रहे हैं। 2025 में पुणे के मुंधवा जमीन सौदे को लेकर भी उनका नाम चर्चा में आया था। हाल के दिनों में वे राजनीति में सक्रिय हुए हैं, लेकिन अपने पिता की तरह एक प्रभावशाली नेता के तौर पर अब तक पार्टी में स्थापित नहीं हैं।

3. इन वरिष्ठ नेताओं की भूमिका की भी चर्चा
अजित पवार के गुट में 41 विधायक हैं, और बिना किसी स्पष्ट उत्तराधिकारी के डिप्टी सीएम पद के लिए पार्टी के किसी वरिष्ठ विधायक या नेता के नाम पर भी विचार किया जा सकता है। अजित पवार के अलावा राकांपा में कुछ वरिष्ठ नेताओं के प्रभाव की चर्चा चलती रही है। इनमें प्रफुल्ल पटेल, जयंत पाटिल, छगन भुजबल, धनंजय मुंडे और सुनील तटकरे जैसे नाम शामिल हैं।

प्रफुल्ल पटेल: अजित पवार के बाद राकांपा में चंद बड़े नेताओं में प्रफुल्ल पटेल का नाम सबसे आगे है। जब शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा का विभाजन हुआ था, तब अजित पवार के वफादार नेता के तौर पर उनके साथ प्रफुल्ल पटेल पार्टी से जुड़े थे। इसी के साथ जब अजित पवार ने जुलाई 2023 में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो उनके साथ मंत्री के तौर पर प्रफुल्ल पटेल ने भी मंत्री पद की शपथ ली।

छगन भुजबल: अजित पवार के डिप्टी सीएम बनने के बाद छगन भुजबल दूसरे नेता थे, जिन्होंने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली थी। छगन भुजबल राकांपा के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं, जिनके पास करीब 40 साल का राजनीतिक अनुभव है। उनकी सियासी यात्रा शिवसेना से होते हुए कांग्रेस और फिर शरद पवार के साथ राकांपा तक पहुंची। हालांकि, जब अजित पवार ने राकांपा से अलग होने का फैसला किया तो उन्हें छगन भुजबल का साथ मिला। छगन महाराष्ट्र में बड़े ओबीसी नेता हैं और कई मौकों पर मराठी राजनीति में पिछड़ा वर्ग की आवाज बनकर उभरे हैं। अपनी इसी ताकत की वजह से वे राकांपा का अहम चेहरा बने हैं। 

धनंजय मुंडे: बीड और मराठवाडा में प्रभावशाली नेता के तौर पर पहचान बनाने वाले धनंजय मुंडे भी राकांपा के कद्दावर नेताओं में से हैं। वे भाजपा के बड़े चेहरों में शामिल रहे गोपीनाथ मुंडे के भतीजे हैं। हालांकि, भाजपा से अलग उन्होंने राकांपा (अविभाजित) के साथ अपनी पहचान स्थापित की। इस दौरान उनकी करीबी अजित पवार से हुई और जब राकांपा का विभाजन हुआ तो धनंजय उनके साथ ही हो गए। हालांकि, बताया जाता है कि धनंजय असल में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीबी रहे हैं और अजित पवार की राकांपा में रहते हुए वे महायुति में एकजुटता बनाने में अहम सहयोगी रहे। इसके चलते पार्टी के साथ-साथ गठबंधन में भी वे एक प्रभावशाली चेहरा रहे हैं।

सुनील तटकरे: सुनील तटकरे मौजूदा समय में राकांपा की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हैं और रायगढ़-कोकण क्षेत्र में प्रभावशाली नेता हैं। उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस के साथ हुई, हालांकि बाद में वे राकांपा में शामिल हो गए। इस दौरान उन्होंने कई विधानसभा चुनाव जीते और महाराष्ट्र में कई मंत्रालय संभाले हैं। सुनील तटकरे 2019 में राकांपा से सांसद बने। इसके बाद 2024 में अजित पवार गुट के साथ भी उन्होंने लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की। मौजूदा समय में वे लोकसभा में राकांपा के इकलौते नेता हैं। विधानसभा और लोकसभा तक में अपने प्रभाव की वजह से सुनील तटकरे का राकांपा में बड़ा कद रहा है।

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