फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

NCERT Book Row: सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- सरकार विशेषज्ञ समिति बनाए तो अच्छा लगेगा; अब सभी किताबें रिव्यू करें

Wed, 11 Mar 2026 12:10 PM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

एनसीईआरटी की आठवीं कक्षा की किताब में न्यायपालिका पर विवादित टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी के बाद केंद्र सरकार अब विशेषज्ञों के पैनल से सभी कक्षाओं की किताबों की समीक्षा कराएगी। कोर्ट ने इसे न्यायपालिका के खिलाफ एक साजिश बताया था।

विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने की सख्त टिप्पणी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि उसने एनसीईआरटी को सभी कक्षाओं की किताबों की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि एनसीईआरटी से ऐसा करने के लिए कहने के बजाय, अगर केंद्र पाठ्यक्रम की समीक्षा करने के लिए एक विशेषज्ञ कमिटी बनाता तो अच्छा होता।

विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट एनसीईआरटी की क्लास आठ की सोशल साइंस की किताब से जुड़े एक स्वतः संज्ञान केस की सुनवाई कर रहा था, जिसमें ज्यूडिशियरी में को लेकर आपत्तिजनक कंटेंट प्रकाशित किया गया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार ने एनसीईआरटी से सिर्फ कक्षा आठ की नहीं, बल्कि सभी क्लास की टेक्स्टबुक्स का समीक्षा करने को कहा है। उन्होंने बेंच को भरोसा दिलाया कि पाठ्यक्रम की जांच के लिए डोमेन विशेषज्ञ का एक पैनल बनाया जाएगा।

सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वालों का ब्योरा तलब
पीठ ने सोशल मीडिया पर इस अध्याय से जुड़ी सामग्री के प्रसार पर भी चिंता जताई। केंद्र को निर्देश दिया कि ऐसी वेबसाइटों व उन्हें संचालित करने वालों की पहचान कर उनकी जानकारी कोर्ट में पेश करें, ताकि उन पर उचित कार्रवाई की जा सके। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट जिम्मेदार लोगों को नहीं छोड़ेगा, भले ही वे देश के बाहर छिपे हों। कोर्ट ने कहा, उसे पक्का यकीन है कि सांड को सींग से पकड़ना चाहिए।
विज्ञापन


विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश
पीठ ने पूछा कि आखिर किस तरह स्कूलों के लिए पाठ्यक्रम तैयार व प्रकाशित किया जा रहा है। सरकार को एनसीईआरटी की किताबों में कानूनी अध्ययन से जुड़े पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए एक सप्ताह में विशेषज्ञों की समिति बनाने का निर्देश दिया। कहा, समिति में संभव हो तो एक पूर्व जज, एक शिक्षाविद व एक प्रतिष्ठित विधि विशेषज्ञ शामिल हों।


तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि एनसीईआरटी में व्यवस्था को सुधारने के लिए बड़े बदलाव शुरू हो गए हैं। अब विशेषज्ञों की मंजूरी के बिना कोई भी नई सामग्री प्रकाशित नहीं की जाएगी। इसके साथ ही एनसीईआरटी के डायरेक्टर ने कोर्ट में हलफनामा देकर बिना शर्त माफी भी मांग ली है।
विज्ञापन

इससे पहले 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस किताब की छपाई और इंटरनेट पर इसके वितरण पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। कोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि किताब में लिखी बातें न्यायपालिका पर गोली चलाने जैसी हैं और इससे संस्थान को गहरा जख्म मिला है। कोर्ट ने इसे न्यायपालिका की गरिमा गिराने की एक गहरी साजिश और सोची-समझी चाल करार दिया। अदालत ने आदेश दिया है कि बाजार में मौजूद इस किताब की सभी प्रतियों को तुरंत जब्त किया जाए और उन्हें सार्वजनिक पहुंच से पूरी तरह हटाया जाए।

अन्य वीडियो-

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें