सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, ‘इस संवेदनशील मामले में अभियोग चलाने के लिए जिस ढंग से अपील की गई, वह अति निंदनीय है।’ सुप्रीम कोर्ट आगे ने कहा, ‘2018 में मादक पदार्थ मामले में आरोपियों को बरी किए जाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ 652 दिन के बाद उसके समक्ष याचिका दायर की गई।’ साथ ही कोर्ट ने लंबे अंतराल की ओर इशारा करते हुए कहा कि एनसीबी मुख्यालय ने एक साल तक फाइल को अपने पास रखा।
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय की पीठ ने एक फरवरी को पारित अपने आदेश में कहा, 'हमने पाया है कि मादक पदार्थों से संबंधित इस संवेदनशील मामले में अभियोग चलाने के लिए जिस ढंग से अपील की गई है, वह बेहद निंदनीय है। विशेष अवकाश याचिका 652 दिन की देरी से दाखिल की गई।' इसे लेकर पीठ ने कहा, 'हम इस मामले में एनसीबी मुख्यालय से स्पष्टीकरण मांगते हैं कि इस प्रकार की लापरवाही के लिए किस अधिकारी पर किस तरह से कार्रवाई की गई है और किसकी जिम्मेदारी तय की गई है।'
बता दें यह मामला वर्ष 2013 में एक कार से कथित रूप से पांच किलो प्रतिबंधित हेरोइन बरामद होने से संबंधित है। इस मामले में हाईकोर्ट ने कुछ आरोपियों को बरी कर दिया था। इन आरोपियों पर एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दाखिल गया गया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में विफल रहा है। उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था।