सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (एनबीसीसी) को नोएडा एक्सप्रेस-वे स्थित सुपरटेक की एमराल्ड कोर्ट सोसायटी के दो टावरों का निरीक्षण कर यह बताने के लिए कहा है कि इनका निर्माण नियमों के अनुरूप किया गया है या नहीं? साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि जो खरीददार पैसे वापस चाहते हैं, कंपनी को उन्हें पैसे वापस करने होंगे।
न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहिंग्टन एफ नरीमन की पीठ ने एनबीसीसी को एमराल्ड कोर्ट सोसायटी का निरीक्षण कर चार हफ्ते के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है। एनबीसीसी यह निरीक्षण करेगा कि क्या निर्माण नियमों के तहत हुआ है या नहीं।
एनबीसीसी यह भी देखेगा कि क्या वहां नियम के तहत हरित क्षेत्र है। क्या एमराल्ड कोर्ट की दो टावरों के बीच उतनी दूरी है, जितना नियम के अनुसार होना चाहिए। शीर्ष अदालत अब छह सितंबर को इस मामले पर सुनवाई करेगी।
सुनवाई के दौरान दो खरीददारों की ओर से कहा गया है कि उन्हें फ्लैट नहीं चाहिए, उन्हें पैसा वापस किया जाए। हालांकि, 40 खरीदारों की ओर से कहा गया कि उन्हें फ्लैट चाहिए। इस पर पीठ ने एमराल्ड कोर्ट के डेवलपर सुपरटेक को नोटिस जारी किया है।
पीठ ने टिप्पणी की कि जो खरीददार अपना पैसा वापस लेना चाहता हो, उसे पैसा वापस लौटाया जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि ऐसे लोग मामले में क्यों उलझे रहें। सुपरटेक की ओर से कहा गया कि इन दोनों टावरों का निर्माण नियमों के अनुरूप हुआ है। उन दो टावरों के बीच की दूरी नौ मीटर है जो नियम के अनुरूप है। पिछली सुनवाई में सुपरटेक की ओर से कहा गया था कि करीब 150 खरीदारों को पैसे वापस लौटाए जा चुके हैं।