सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई का सामने कर रहे नक्सली अब अंतरराज्यीय सीमाओं के पास नए क्षेत्रों में घुसने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, इसमें उन्हें कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिली है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) की एक ताजा रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार की बहुआयामी रणनीति से हिंसक घटनाओं में 48 फीसदी कमी आई है। इस रणनीति में अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस के नक्सल विरोधी अभियान और माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में विकास की पहलें शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2013 में 1,136 हिंसक घटनाएं हुईं, जबकि 2023 में घटकर यह 594 रहीं। वहीं, नागरिकों और सुरक्षा बलों की मौतों में 65 फीसदी कमी आई है। 2013 में 397 मौतें हुई थीं, जो 2023 में घटकर 138 हो गईं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि 31 मार्च 2026 तक देश नक्सलवाद मुक्त हो जाएगा। मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया, 2023 में 42 जिलों के 171 थानों में नक्सली हिंसा की घटनाएं हुईं, जबकि 2013 में 76 जिलों में यह संख्या 328 थी। रिपोर्ट के मुताबिक, नक्सल हिंसा का दायरा अब काफी सीमित हो चुका है और वामपंथी उग्रवाद की 91 फीसदी हिंसा सिर्फ 25 जिलों में हुई है।
मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि भाकपा (माओवादी) अभी भी देश के विभिन्न वामपंथी उग्रवादी समहूों में सबसे प्रभावशाली है। इस समूह की गतिविधियों की वजह से कुल हिंसक घटनाओं में 90 फीसदी से अधिक हिंसक घटनाएं और 95 फीसदी मौतें हुई हैं। इसमें आगे कहा गया है कि नक्सलियों, खासकर भाकपा (माओवादी) ने अंतरराज्यीय सीमाओं पर कई नई जगहों पर अपने प्रभाव को फैलाने की कोशिश की है। लेकिन उन्हें इस क्षेत्र में कोई विशेष सफलता नहीं मिली है।
नक्सलियों की पुरानी विचारधार विकास में बाधा
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि नक्सली अपनी पुरानी विचारधारा को कायम रखने के लिए लोगों को उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों में हाशिए पर रखना चाहते हैं। इसके परिणामस्वरूप, नक्सल प्रभावित कई क्षेत्रों में विकास की प्रक्रिया कई दशकों पीछे चली गई है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, राज्य सरकारों द्वारा उठाए गए विभिन्न उपायों और केंद्र सरकार की विकास पहलों के कारण नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नक्सली अब हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
आईईडी और सुरक्षा बलों की सुरक्षा
रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया गया है कि नक्सलियों द्वारा उपयोग किए गए इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) से सुरक्षा बलों को ज्यादा नुकसान होता है। गृह मंत्रालय ने आईईडी प्रबंधन में सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और राज्य पुलिस की काउंटर-आईईडी क्षमता को मजबूत किया है।
मणिपुर में हिंसक घटनाओं के 187 मामले
मणिपुर में 2023 में मेतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा हुई, जिसके कारण हिंसक राज्य में हिंसक घटनाएं बढ़ीं। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वोत्तर में हुई कुल हिंसा में से 77 फीसदी हिंसा मणिपुर में हुई। पूर्वोत्तर में कुल 243 हिंसक घटनाएं हुईं, जिनमें से 187 घटनाएं मणिपुर में हुईं। मणिपुर में पुलिस और सेना ने उग्रवादियो के खिलाफ कार्रवाई की, जिसमें 33 उग्रवादियों को मार गिराया गया और 184 को गिरफ्तार किया गया।
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