बीजापुर में नक्सलियों ने शनिवार को सुरक्षाकर्मियों पर जहां हमला किया, वह बेहद दुर्गम इलाका है। फिर भी जवानों ने नक्सलियों की लाइट मशीनगन और आईईडी हमले का आखिरी गोली तक डटकर मुकाबला किया। तीन ओर से घने जंगलों से घिरे होने के बावजूद सुरक्षा बल के जवानों और कोबरा कमांडो ने नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब दिया।
प्लानिंग की नाकामी
शहादत को कार्ययोजना के स्तर पर नाकामी माना जा रहा है। 400 नक्सलियों ने 700 जवानों की घेराबंदी करके उन पर तीन घंटे गोलियां बरसाईं। रेस्क्यू टीम 24 घंटे बाद भी जवानों के शव लेने नहीं पहुंच सकी। स्थिति तब है, जब 20 दिन से ड्रोन से ली गई तस्वीरों में इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में नक्सलियों की उपस्थिति की सूचना मिली थी।
अफसरों की मौजूदगी से नक्सली हुए अलर्ट
केंद्र के वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार व सीआरपीएफ के पूर्व महानिदेशक विजय कुमार के अलावा आईजी आपरेशन व अन्य अधिकारी पिछले 20 दिन से बीजापुर, रायपुर व जगदलपुर क्षेत्र में हैं। इनकी मौजूदगी ने नक्सलियों को अलर्ट किया।
रणनीति न बदलना
गोरिल्ला लड़ाई के जानकार मानते हैं कि एक ही रणनीति लंबे समय तक नहीं अपनाई जानी चाहिए। नक्सली उस रणनीति की काट ढूंढ लेते हैं।
तकनीक पर ज्यादा निर्भरता
नक्सलियों के मूवमेंट की जानकारी के लिए तकनीक ही मुख्य माध्यम रह गई है। नक्सली आपरेशन से जुड़े लोग मानते हैं सिर्फ इसी के आधार पर ऑपरेशन की योजना नहीं बनाई जा सकती।
खुफिया तंत्र पड़ा कमजोर
अधिकारी आत्मसमर्पण कराकर वाहवाही लूटने पर ज्यादा ध्यान देते रहे हैं। ऐसे में खुफिया तंत्र से मिलने वाली सूचनाएं कम हो जाती है।
शहीदों को सलाम, बलिदान नहीं भुलाया जा सकता
शोक संतप्त परिवारों के प्रति मैं संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। देश बलिदान को कभी नहीं भूलेगा। - रामनाथ कोविंद, राष्ट्रपति
वे पूरे साहस के साथ लड़े और उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। - राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री
छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार लड़ाई में बलों को हरसंभव सहायता देती रहेगी।- सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष
शहीद जवान
हाल के बड़े हमले
फ्रांस ने कहा, हम भारत के साथ...भारत में फ्रांस के राजदूत इमैनुएल लीनेन ने ट्विटर पर अपने संदेश में कहा, शहीद जवानों के परिवार के दुख में शरीक हूं। उन्होंने लिखा कि फ्रांस आतंकवाद के खिलाफ हर लड़ाई में भारत के साथ खड़ा है।