नक्सलियों के बिहार झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी (बीजेएसएसी) के सदस्य प्रद्युमन शर्मा ने अपनी भतीजी के निजी मेडिकल कॉलेज में नामांकन के लिए 22 लाख रुपए का भुगतान किया। इसी तरह बीजेएसएसी के ही एक अन्य सदस्य संदीप यादव की बेटी देश के नामचीन निजी संस्थान और बेटा निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं।
नक्सलियों की फंडिंग पर नजर रख रही जांच एजेंसियों के पास यह ब्यौरा उपलब्ध है कि नक्सली नेता अपने बच्चों की शिक्षा पर सालाना लाखों रुपए खर्च कर रहे हैं। इसकी उगाही जंगल में चल रहे खनन जैसी गतिविधियों से होती है जिसे नक्सली विचारधारा के नाम पर शामिल गांवों से लड़के अंजाम देते हैं।
गृहमंत्रालय ने नक्सली नेताओं की फंडिंग के नेटवर्क पर अंकुश लगाने के लिए एक मल्टी डिसिप्लीनरी ग्रुप का गठन किया है। इस ग्रुप में खुफिया एजेंसी आईबी के संयुक्त सचिव, नेशनल इनवेस्टिगेश एजेंसी (एनआईए), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई के अधिकारी शामिल हैं। राज्य स्तर पर सामंजस्य के लिए स्थानीय एजेंसियों को भी ग्रुप में शामिल किया गया है। गृहमंत्रालय एनआईए में टेरर फंडिंग के इतर नक्सली फंडिंग के लिए अलग सेल का गठन किया जा रहा है।
गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक नक्सली जंगल में सरकारी योजनाओं पर काम कर रहे निजी ठेकेदारों से मोटी रकम वसूल रहे हैं। इसके अलावा जंगल में अवैध खनन करवा कर नक्सली करोड़ों की उगाही करते हैं।
ट्रांसपोर्टर और छोटे व मझोले उद्योगपती भी नक्सलियों की फंडिंग का ठोस स्रोत हैं। तेंदु पत्ते की ठेकेदारी भी ऐसा धंधा है जो दशकों से नक्सलियों के धन का बड़ा जरिया है। सरकारी एजेंसियां इस पर अकुश नहीं लगा पाई है। मंत्रालय का कहना है कि नक्सली नेता गांवों के युवकों को विचारधारा के नाम पर बहला कर या जबरन अपने गिरोह में शामिल करते हैं। लेकिन अपने बच्चों को मंहगे निजी कॉलेजों में पढ़ा रहे हैं।
गृह मंत्रालय ने मुताबिक नक्सली फंडिंग के खिलाफ मुहीम में ईडी ने प्रद्युमन शर्मा, विजय यादव और सीपीआई (माओवाद) के मुसाफिर सहनी के खिलाफ पीएमएलए के तहत अब तक चार मामले दर्ज किए हैं। ईडी ने इन लोगों की 1.5 करोड़ की संपत्ति जब्त की है। इसके अलावा नक्सली नेताओं के शहरी ठिकानों से अब तक 2.45 करोड़ रुपए नगद जब्त किया गया है।