उन्होंने बताया कि कड़ी सुरक्षा के बीच देश के 44 जिलों में नक्सली या तो है नहीं या फिर उसकी मौजूदगी न के बराबर हो गई है। नक्सली हिंसा अब उन 30 जिलों तक सिमट गई है इनमें वो जिले भी शामिल हैं जो कभी इससे बुरी तरह प्रभावित थे। गृह मंत्रालय ने 10 राज्यों में 106 जिलों को नक्सल प्रभावित की श्रेणी में रखा है। उन्होंने बताया कि 11 राज्यों में 90 जिले तो ऐसे हैं जिसमे पिछले एक साल में 58 से कम बार हिंसा हुई है।
जिन जिलों में नक्सली हमले कम हुए हैं वहां सरकार ने सुरक्षा संबंधी खर्च ( एसआरई ) में काफी बदलाव किए हैं। इसका उद्देश्य सुरक्षा संबंधी खर्च जैसे ढुलाई, वाहनों को भाड़े पर लेना, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को वजीफा देना, बलों के लिए आधारभूत ढांचे का निर्माण आदि के लिए भुगतान करना है। इस पूरे खर्चे को श्रेणीबद्ध करने से सुरक्षा और विकास संबंधी संसाधनों की तैनाती पर ध्यान केंद्रित करने का आधार मिला जिससे की इस पूरी हिंसा में कमी आई है। बीते कुछ वर्षों में कुछ जिलों को छोटे जिलों में बांट दिया गया है। इसके बाद से ही 106 एसआरई जिलों का भौगोलिक इलाका 126 जिलों में फैला है।
बता दें कि पिछले कुछ दिनों से गृह मंत्रालय ने नक्सल प्रभावित जिलों के निरीक्षण के लिए पिछले कुछ दिनों से राज्यों के साथ व्यापक स्तर पर बातचीत की ताकि बदलती जमीनी सच्चाई के मुताबिक बलों और संसाधनों की तैनाती की जा सके।
इस तरह सुरक्षा सूची से 44 जिलों को बाहर किया गया और आठ नए जिले जोड़े गए हैं वहीं इस मामले में एक अन्य अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा संबंधी खर्चों के लिए चुने गए जिलों की कुल संख्या 90 हैं।