भारतीय समुद्र के आसपास चीनी सेना की बढ़ती गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने पूरी तरह कमर कस ली है। अमेरिका से 24 एंटी-सबमैरिन हेलिकॉप्टर खरीदने की तैयारी के बाद अब भारतीय नौसेना के लिए 45 हजार करोड़ रुपये में 6 एडवांस पनडुब्बियां तैयार कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि बेहद घातक किस्म की ये पनडुब्बियां महत्वाकांक्षी ‘सामरिक साझेदारी (एसपी) मॉडल’ के तहत तैयार की जाएंगी।
भारतीय नौसेना एडवांस किस्म की इन पनडुब्बियों को 500 किलोमीटर की रेंज तक जहाज नष्ट करने वाली मिसाइलों से लैस कराना चाहती है। साथ ही इनमें जमीन पर हमला करने में सक्षम 12 क्रूज मिसाइलें, 18 बडे़ टारपीडो और कई अन्य घातक हथियार भी लगे होंगे। ये पनडुब्बियां फिलहाल मुंबई के मझगांव डॉकयार्ड में बन रही 6 स्कॉर्पियन क्लास की पनडुब्बियों से करीब 50 फीसदी ज्यादा बड़ी होंगी। प्रोजेक्ट-75 के तहत बन रहीं इन स्कॉर्पियन पनडुब्बियों को फ्रांसीसी कंपनी नेवल ग्रुप ने डिजाइन किया है। इसी प्रोजेक्ट का अगला चरण प्रोजेक्ट-75(1) है, जिसके तहत एडवांस पनडुब्बियां बनाई जाएंगी।
सरकार के महत्वाकांक्षी सामरिक साझेदारी मॉडल के तहत यह दूसरा प्रोजेक्ट होगा। इससे पहले सरकार ने इस मॉडल के तहत नेवी के लिए ही 21 हजार करोड़ रुपये की लागत से 111 यूटिलिटी हेलिकॉप्टर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की थी।
भारतीय नौसेना के अधिकारियों ने इन 6 एडवांस पनडुब्बियों के निर्माण के बाद मलक्का की खाड़ी से लेकर हिंद महासागर के दूसरे कोने तक का हिस्सा एक साथ भारतीय निगरानी के दायरे में आ जाने का दावा किया। साथ ही देश में पनडुब्बी डिजाइन करने व उसका निर्माण करने के इको-सिस्टम को भी इससे अहम लाभ मिलने का दावा किया गया है।