पाकिस्तान से जारी तनाव के बीच नौसेना की हिंद महासागर में और ताकत बढ़ने वाली है। नौसेना को रूस निर्मित आधुनिक स्टील्थ मिसाइल युद्धपोत तमाल जून अंत तक मिलने की उम्मीद है। रडार की पकड़ में नहीं आने वाला यह युद्धपोत दुश्मन की पनडुब्बियों और स्टील्थ जहाजों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। आईएनएस तमाल, आईएनएस तुशिल के साथ मिलकर काम करेगा। इस युद्धपोत के शामिल होने से नौसेना की सामरिक ताकत बढ़ जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि तमाल को जून के अंत में रूस के कलिनिनग्राद स्थित यांतर शिपयार्ड में नौसेना को सौंपा जाएगा। इसके सितंबर में पश्चिमी तट पर पहुंचने की उम्मीद है। इस युद्धपोत के नौसेना में शामिल होने से हिंद महासागर में समुद्री शक्ति में इजाफा होगा। समुद्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता के चलते तमाल के शामिल होने से नौसेना की हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक पहुंच को बढ़ावा मिलेगा। यह युद्धपोत नौसेना के मुंबई स्थित पश्चिमी बेड़े का हिस्सा होगा।
उन्होंने बताया कि तमाल ने अपने सभी तरह के परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। उन्होंने बताया कि 200 से अधिक भारतीय नौसैनिकों को इस युद्धपोत के संचालन और तकनीकी प्रणाली के लिए रूस में प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। ये तमाल के समुद्री परीक्षण का भी हिस्सा रहे हैं। पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव और बदलते समुद्री सुरक्षा माहौल के बीच, भारत अपनी नौसेना को मजबूत बना रहा है।
तमाल रूस संग 21,000 हजार के रक्षा समझौते का हिस्सा
तमाल युद्धपोत 2016 में रूस के साथ 21,339 करोड़ (2.5 बिलियन डॉलर) के रक्षा समझौते का हिस्सा है। इसके तहत चार क्रिवाक/तलवार श्रेणी के स्टील्थ युद्धपोत बनाए जा रहे हैं। इनमें से दो का निर्माण रूस के यांतर शिपयार्ड में और दो अन्य का निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) में होना है। गोवा में बनने वाले युद्धपोत के लिए रूस अपनी प्रौद्योगिकी देगा।
रूस के साथ समझौते के तहत पहला युद्धपोत आईएनएस तुषिल पिछले साल दिसंबर में यांतर शिपयार्ड में नौसेना में शामिल हुआ था और फरवरी में देश पहुंचा था। तुशिल और तमाल प्रोजेक्ट 1135.6 के उन्नत क्रिवाक-3 श्रेणी के युद्धपोत हैं। ऐसे छह युद्धपोत पहले से ही सेवा में हैं। इनमें से तीन तलवार श्रेणी के हैं। ये रूस के सेंट पीटर्सबर्ग के बाल्टिक शिपयार्ड में बने हैं। अन्य तीन तेग श्रेणी के युद्धपोत हैं और ये यांतर शिपयार्ड पर बने हैं।
नए युद्धपोतों में 26 फीसदी स्वदेशी सामान
नए युद्धपोतों में करीब 26 फीसदी स्वदेशी सामान लगा है। यह पिछले तेग श्रेणी के युद्धपोत से दोगुना है। इनके निर्माण में 33 कंपनियों का योगदान है। इनमें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, ब्रह्मोस एयरोस्पेस (भारत-रूस का संयुक्त उद्यम) और नोवा इंटीग्रेटेड सिस्टम्स (टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी) भी शामिल हैं।
तमाल की खासियतें
- इसका वजन: 3,900 टन
- गति 55 किमी/घंटा
- एक बार में 3000 किमी की दूरी तय करने में सक्षम
- स्टील्थ तकनीक से लैस युद्धपोत दुश्मनों की रडार पर नहीं आएगा
- ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से लैस
- उन्नत रेंज वाली सतह से हवा में मार करने वाली श्टिल मिसाइल भी लगी होगी
- उन्नत मध्यम दूरी की एंटी-एयर और सरफेस गन
- ऑप्टिकली नियंत्रित निकट दूरी की तीव्र फायर गन प्रणाली, टारपीडो और रॉकेट भी शामिल
- अत्याधुनिक रडार-सेंसर भी लगे हुए हैं