पाकिस्तान यात्रा और प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर दिए उनके बयानों के बाद न सिर्फ राजनीतिक तौर पर सिद्धू की फजीहत हुई, बल्कि पार्टी में भी कैप्टन से टकराव के चलते वे गुमनामी में चले गए। पार्टी ने उन्हें दिल्ली चुनाव में स्टार प्रचारकों में शामिल किया था, लेकिन वे एक बार भी नहीं आए। पार्टी की अंदरूनी राजनीति में उलझे सिद्धू को अब लगने लगा है कि वे फिर से खुद को साबित करें और पार्टी उनकी उपयोगिता समझे।