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राष्ट्रवाद व खट्टर सरकार की उपलब्धियां हरियाणा में दिलाएंगी जीत: बराला

Fri, 27 Sep 2019 05:57 AM IST
संदीप भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुभाष बराला - फोटो : अमर उजाला
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लोकसभा चुनाव में विपक्ष का सूपड़ा साफ करने और सभी सीटें जीतने के बाद हरियाणा में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में जबर्दस्त उत्साह है। हालांकि बड़ी संख्या में दूसरे दलों के विधायकों-नेताओं और विभिन्न क्षेत्रों की जानीमानी हस्तियों को पार्टी में शामिल कराने के बाद भाजपा के लिए टिकट बंटवारा बड़ी सिरदर्दी बन गया है। हरियाणा भवन में हिमांशु मिश्र ने राज्य भाजपा अध्यक्ष सुभाष बराला से चुनाव से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश:

विधानसभा चुनाव में लोकसभा चुनाव का प्रदर्शन दुहराने के प्रति आश्वस्त हैं?

लोकसभा चुनाव केनतीजे ने बता दिया कि राज्य के मतदाताओं का विश्वास भाजपा के प्रति पहले से ज्यादा बढ़ा है। हमने राज्य को ईमानादार और पारदर्शी सरकार दी है। लोगों ने राज्य की राजनीति में सकारात्मक बदलाव को महसूसर्टया है।

मतलब पार्टी स्थानीय मुद्दे और राज्य सरकार की उपलब्धियों पर ही चुनाव लडने जा रही है?

हम अपनी और केंद्र सरकार की उपलब्धयां भी गिनाएंगे। राज्य में हमने भ्रष्टाचारमुक्त शासन दिया है। सरकारी नौकरियां देते समय पहली बार धांधली नहीं हुई। फिर राष्ट्रवाद से जुड़े अनुच्छेद 370, 35 ए के साथ-साथ तीन तलाक को दंडणीय अपराध बनाने संबंधी साहसिक फैसले को भी हम अपनी उपलब्धियों केरूप में गिनाएंगे।

मगर जाट आरक्षण, राबर्ट वाड्रा, हुड्डा को जेल भेजने के दावे को धरे के धरे नहीं रह गए?

जाट आरक्षण का सवाल है तो हमने इस बिरादरी को आरक्षण देने का प्रस्ताव विधानसभा में पारित कराया। यह भी साबित हो चुका है कि विपक्ष ने साजिश केतहत हिंसक आंदोलन चलवाया। जहां तक भ्रष्टाचार का सवाल हैतो जांच एजेंसियां लगातार अपना काम कर रही है। कई लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है, कई लोग जेल भी गए हैं। हम बदले की भावना से कार्रवाई नहीं करते, कानून और जांच एजेंसियों को अपना काम करने देते हैं। प्रक्रिया जारी है, दोषी किसी सूरत में नहीं बचेंगे।

राज्य में पहली बार अपने दम पर सरकार बनाने के बावजूद सरकार सभी हिस्सों में मजबूत संगठन क्यों नहीं खड़ा कर पाई?

मैं आपके सवाल से सहमत नहीं हूं। बीते 5 सालों में पार्टी ने जिला-तहसील स्तर तो छोडिय़े, एक-एक बूथ पर मजबूत संगठन तैयार किया है। हर बूथ पर मतदाता सूची के हर पृष्ठ का एक प्रभारी है। 

जब संगठन मजबूत है तो पार्टी दल बदलुओं को क्यों इकट्ठा कर रही है? लोकसभा चुनाव के बाद फिर दूसरे दलों के 15 विधायकों को साथ लाने की जरूरत क्यों पड़ गई?

संगठन मजबूत है तो क्या दूसरे दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नामचीन हस्तियों के लिए पार्टी के दरवाजे बंद कर दें? पार्टी में जो भी शामिल हो रहे हैं उन सभी ने पार्टी की विचारधारा को स्वीकार किया है। इन्हें पार्टी में शामिल करने से कैसे रोक सकते हैं?

दो केंद्रीय मंत्री सहित कई सांसद विधायक अपने रिश्तेदारों केलिए टिकट मांग रहे हैं, इनका कहना है कि जब चौधरी बीरेंद्र सिंह के परिवार से तीन लोगों को टिकट मिल सकता है तो उन्हें क्यों नहीं, इस पर क्या कहेंगे?

चौधरी बीरेंद्र सिंह के केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफे के बाद उनके बेटे को लोकसभा का टिकट दिया गया। वह योग्य और प्रतिभाशाली आईएएस अधिकारी रहे हैं। उनकी पत्नी विधायक हैं। जहां तक अन्य के दावों की बात है तो इस पर आलाकमान फैसला करेगा।

अगर ये केंद्रीय मंत्री भी चौधरी बीरेंद्र सिंह की तरह मंत्रिमंडल से इस्तीफा दें तो क्या इनके रिश्तेदारों को टिकट मिल सकता है?

 इसका फैसला आलाकमान को करना है।

गठबंधन की चर्चाओं के बीच अकाली दल के विधायक का भाजपा दामन थामना, मतलब दोनों दलों के बीच गठबंधन नहीं हो रहा?

राज्य में बतौर संगठन का मुखिया संगठन का प्रचार-प्रसार मेरा दायित्व है। इसलिए मैं अपना कर्तव्य निभा रहा हूं। जहां तक गठबंधन का सवाल है तो इसका फैसला केंद्रीय नेतृत्व को करना है।

कांग्रेस ने इस बार पार्टी की कमान खुल कर भूपेंद्र सिंह हुड्डा को दे दी है, क्या इससे भाजपा की मुश्किलें नहीं बढ़ेगी?

राज्य के मतदाता अपना मन बना चुके हैं। लोकसभा चुनाव इसकी बानगी थी। हुड्डा हों या कोई और इससे अब भाजपा को किसी प्रकार की कोई चुनौती नहीं मिलने वाली।

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