राष्ट्रपति द्रौपद्री मुर्मू ने कहा कि भारतीय चुनाव प्रणाली बेमिसाल है और पूरी दुनिया के समक्ष मजबूत लोकतंत्र की तस्वीर पेश करती है। लोकतंत्र की इस गौरवशाली यात्रा में निर्वाचन आयोग की अहम भूमिका रही है। उन्होंने यह भी कहा कि आयोग का चुनाव प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना सभी लोकतांत्रिक देशों के लिए बेहतरीन मिसाल है। साथ ही यह उम्मीद भी जताई कि भविष्य में इसका इस्तेमाल और बढ़ेगा।
राष्ट्रपति मुर्मू ने बृहस्पतिवार को 14वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महिलाओं, दिव्यांगों और कमजोर समूहों की भागीदारी बढ़ाकर समावेशी चुनाव सुनिश्चित करने में आयोग के प्रयासों की भी सराहना की। चुनाव आयोग की स्थापना भारत के गणतंत्र बनने से एक दिन पहले 25 जनवरी 1950 को की गई थी। पिछले 14 वर्षों से चुनाव आयोग का स्थापना दिवस राष्ट्रीय मतदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है। राष्ट्रपति ने कहा कि 2047 के स्वर्णिम भारत के निर्माण में युवा निर्णायक भूमिका निभाएंगे। देश के युवा लोकतंत्र के भविष्य के कर्णधार हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि लोकतांत्रिक परंपराओं की मर्यादाओं को बनाए रखें और नैतिकता के साथ सरकार चयन में अपने मताधिकार का प्रयोग करें।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने 2023 में संपन्न नौ चुनावों में सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं को अपनाने के लिए संबंधित राज्यों और निर्वाचन अधिकारियों को सम्मानित किया। आयोग की 75 साल की यात्रा को चित्रित करता 500 रुपये का एक डाक टिकट भी जारी किया। इस मौके पर मालदीव, फिलीपीन, श्रीलंका और उज्बेकिस्तान जैसे देशों के चुनाव निकायों के प्रमुख भी मौजूद रहे। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि पिछले 75 वर्षों में चुनाव आयोग ने 17 लोकसभा चुनाव और 400 से अधिक विधानसभा चुनाव कराए हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव प्रक्रिया को दुनिया का सबसे बड़ा अभ्यास करार दिया और कहा कि लोगों ने 12 लाख से अधिक मतदान केंद्रों पर मतदान किया और इसका प्रबंधन 1.5 करोड़ मतदान कर्मियों ने संभाला।
मतदान के अधिकार का सभी करें इस्तेमाल : सीईसी
मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) राजीव कुमार ने इस मौके पर कहा कि चुनाव आयोग के प्रति 96 करोड़ मतदाताओं का अटूट विश्वास प्रेरणा स्रोत है। 2023 में नौ राज्यों में चुनावों के स्वतंत्र, निष्पक्ष, समावेशी और शांतिपूर्ण संचालन आयोग की विश्वसनीयता का परिचायक है। उन्होंने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि अपने मताधिकार को जानें और इसका इस्तेमाल जरूर करें। उन्होंने कहा कि आयोग का प्रयास है कि भारतीय चुनावों का उदाहरण दुनियाभर में उल्लेखनीय बने और पूरी दुनिया में भारतीय चुनाव प्रणाली की छवि एक स्वर्ण मानक के तौर पर और मजबूत हो।
समावेशी और पारदर्शी प्रक्रिया अपना रहे
चुनाव आयुक्त अनूप चंद्र पांडेय ने कहा, आयोग ने समावेशी और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए अनेक पहल की हैं। इसका नतीजा है कि बड़े पैमाने पर नागरिकों को मतदान का अधिकार मिल रहा है। उन्होंने बताया कि आयोग सतत प्रक्रिया के तहत नागरिकों को वोट की अहमियत से अवगत करा रहा है। आयोग हर संभव प्रयास करके देश के शतप्रतिशत नागरिकों को मतदाता पहचान पत्र उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है।
मेघवाल ने आंबेडकर के योगदान को किया याद
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने अपने संबोधन में महिलाओं का मताधिकार सुनिश्चित करने का श्रेय संविधान निर्माता बीआर आंबेडकर को दिया। उन्होंने कहा कि आंबेडकर ने 1928 में ही महिलाओं के लिए वोट देने के अधिकार का मुद्दा उठाया था। उन्होंने संविधान सभा की बहस के दौरान एक वोट, एक व्यक्ति, एक मूल्य के सिद्धांत की वकालत की थी।