Chandipura Virus Outbreak: गुजरात में चांदीपुरा वायरस के फिर लौटने के बाद आईसीएमआर ने विशेषज्ञों की राष्ट्रीय टीम भेजी है। टीम बीमारी के फैलने की वजह, इसे रोकने के तरीकों और इलाज की संभावनाओं पर काम करेगी। जानें कितना खतरनाक है यह वायरस और बच्चों को इससे कितना खतरा है।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के विशेषज्ञों की एक राष्ट्रीय टीम को गुजरात भेजा गया है। टीम चांदीपुरा वायरस के संक्रमण की जांच करेगी। साथ ही, इससे निपटने की तैयारियों को मजबूत करने का काम भी करेगी।
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चांदीपुरा वायरस का प्रकोप फिर क्यों फैला?
आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा कि टीम राज्य के अधिकारियों और अन्य विशेषज्ञों के साथ मिलकर बीमारी को समझने, इसके फैलाव को रोकने और इसके इलाज के तरीकों पर काम कर रही है।
बहल ने बताया कि चांदीपुरा वायरस का प्रकोप पहले भी कई बार हुआ है, लेकिन पिछली बार इसका प्रकोप करीब दो साल पहले हुआ था। अब फिर इसका प्रकोप चल रहा है। गुजरात में इसके लिए एक विशेष टास्क फोर्स भी काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि आईसीएमआर की टीमें पिछले दो साल से गुजरात में इस बीमारी की जांच कर रही हैं। साथ ही, इसके फैलने के कारणों को समझने की कोशिश भी कर रही हैं।
बहल ने बताया कि आईसीएमआर की टीम दूसरे विशेषज्ञों के साथ मिलकर पिछले दो साल से चांदीपुरा बीमारी को समझने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा, हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह बीमारी कहां से आ रही है और क्यों हो रही है। इसकी पिछले दो साल से जांच की जा रही है।
बीमारी से निपटने के लिए क्या हो रही तैयारी?
उन्होंने बताया कि गुजरात के प्रभावित इलाकों में टीमें पहले से ही काम कर रही थीं। अब इस बीमारी से निपटने की कोशिशों को और मजबूत करने के लिए एक राष्ट्रीय टीम भी भेजी गई है। उन्होंने कहा, बीमारी को समझने, उसे नियंत्रित करने और आखिरकार उसके इलाज के लिए भी वहां कई नए काम किए जा रहे हैं।
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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने भी चांदीपुरा वायरस के प्रकोप से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने के लिए गुजरात और राजस्थान में राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल (एनजेओआरटी) भेजा है। इस बीमारी से निपटने के लिए बीमारी की निगरानी भी की जा रही है।
यह निगरानी राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) के समन्वय में एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के तहत की जा रही है। इसमें राज्य की निगरानी करने वाली इकाइयां भी शामिल हैं। एनसीडीसी के जन स्वास्थ्य आपातकालीन संचालन केंद्र को भी एनजेओआरटी की मदद के लिए सक्रिय किया गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, चांदीपुरा वायरस (सीएचपीवी) रैब्डोविरिडे परिवार का एक वायरस है। इसका संबंध खास तौर पर बच्चों में होने वाले एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से है।
यह वायरस कुछ वाहक जीवों के जरिये फैलता है। इनमें सैंडफ्लाई, मच्छर और किलनी शामिल हैं। गुजरात में फ्लीबोटोमस पापाटासी नाम की सैंडफ्लाई को इस वायरस का वाहक बताया गया है।
यह बीमारी बुखार से शुरू हो सकती है। इसके बाद मरीज को दौरे पड़ सकते हैं और वह कोमा में जा सकता है। गंभीर मामलों में मरीज की मौत भी हो सकती है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, भारत में चांदीपुरा वायरस के पिछले प्रकोपों में इस बीमारी से मौत की दर 56 से 75 फीसदी तक रही है।